सब कुर्सी का चक्कर है !

राम वशिष्ठ (युवा चिन्तक व फिल्म निर्देशक) :

नागरिकता संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया । यह एक बहुत अच्छा बिल है जो मानवीय मूल्यों की रक्षा करता है लेकिन इस बिल का भी विरोध हो रहा है । आखिर क्यों हो रहा है विरोध ? और कौन कर रहा हैं विरोध ? इसकी पड़ताल करने के लिए इसके प्रत्येक पहलू पर विचार करना जरूरी है ।

कौन कर रहे हैं विरोध ?

इस बिल का विरोध पाकिस्तान कर रहा हैं । वैसे पाकिस्तान का इसमें कुछ भी लेना – देना नहीं है क्योंकि यह बिल भारत की संसद में पास हुआ है और यह भारत का आतंरिक मामला हैं , साथ ही भारत एक स्वतंत्र , लोकतांत्रिक देश है तो पाकिस्तान का कोई हक नहीं है कि इस पर कुछ बोले लेकिन पाकिस्तान इन दिनों तीसरे दर्जे के नेताओं और आला दर्जे के दहशतगर्दों का देश हैं जिनका जीवन यापन ( राजनीति और दहशतगर्दी ) भारत विरोध पर चल रहा हैं । अमेरिका की एक संस्था ने विरोध जताया । आधुनिक विश्व का प्रथम लोकतंत्र देश अमेरिका अब लोकतंत्र का ओवरडोज लेकर ऐसा हो गया है कि अपने लिए नमूना राष्ट्रपति ( जैसा ट्रंप है वैसे आदमी को हमारे यहाँ देशी भाषा में बोट या हूस कहते हैं जिसका एक पर्यायवाची ठप आदमी भी होता हैं ) चुन लेता है । तो ऐसी संस्था हमें ज्ञान ना ही दे तो बेहतर है । भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के नाम के साथ विश्वविद्यालय शब्द जोड़कर बनाया गया एक परिसर जो इन दिनों अड्डा हैं अधेड़ , कुशिक्षा प्राप्त चरसी , कामपिपासु , और हर बात में भारत का विरोध करने वाले युवक युवतियों का , उस अड्डे से इस बिल का विरोध कर रहे हैं वो तथाकथित लिबरल की विचारों से कुपोषित पौध ।

इस बिल का विरोध कर रही हैं कांग्रेस पार्टी । कांग्रेस पार्टी इन दिनों एक ऐसा संगठन हैं जिसका राजनीतिक इम्नयून सिस्टम गांधी नामक परजीवी विषाणु के द्वारा दिनों दिन कमजोर होता जा रहा है ( जैसे मनुष्य शरीर में एडस नामक परजीवी वायरस मनुष्य के शरीर को कमज़ोर कर मार देता है ) और एक दिन खत्म भी कर देगा । आज कांग्रेस में चमचों और चाटुकारों जमावड़ा है । ऐसे – ऐसे चमचे और चाटुकार है कि 92 साल का बुजुर्ग भी अपनी बेटी ( कांग्रेस अध्यक्षा ) और पोती ( कांग्रेस महासचिव ) की उम्र वाली महिलाओं के तलुवे चाटकर माताजी प्रणाम करने में खुद को गौरवान्वित महसूस करता है ।

इस बिल का विरोध कर रही हैं समाजवादी पार्टी । वो समाजवादी पार्टी जो समाजवाद के नाम पर केवल परिवारवाद की बात करती हैं और राजनीति के नाम पर साम्प्रदायिक राजनीति करती हैं । वो लोग ( यूपी के अधेड़ उम्र के दो अच्छे लड़के ) विरोध में बोल रहे हैं जिनकी खोपड़ी में भगवान ने दिमाग की जगह पर पता नहीं क्या रखा है । वो कम्यूनिस्ट पार्टी विरोध कर रही हैं जो एक सत्यापित रूप से असफल विचारधारा ( आज से 30 साल पहले घटित दो विश्व स्तरीय घटनाओं ने साबित किया था )पर आधारित हैं । वाममार्गी विचारधारा वस्तुतः एक कुमार्गी विचारधारा से अधिक कुछ भी नहीं है । इस बिल का विरोध कर रहे हैं मुस्लिम कौम के ठेकेदार बन् कुछ कठमुल्ले और नेता जिन्होंने कभी भी मुस्लिमों की स्थिति बेहतर करने का कोई प्रयास नहीं किया केवल अपने हित साधने में लगे रहे हैं । अब क्या ऐसे लोगों का एतबार करना चाहिए ?

बिल क्या है ?

यह बिल पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के पीड़ित लोगों को भारत की नागरिकता देने के लिए हैं । इन देशों में हिन्दू , सिख , बौद्ध , जैन , ईसाई पंथ / धर्म के लोग अल्पसंख्यक है और उन पर इन देशों का बहुसंख्यक समुदाय जो मुस्लिम है वो बेइंतहा ज़ुल्म करता है ।

विरोधियों की आपत्ति क्या है ?

विरोधी इसे मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं क्योंकि इसमें पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिमों को नागरिकता देने की बात नहीं है । यह हास्यस्पद है कि मुस्लिम बहुल देश की मुस्लिम आबादी को भारत नागरिकता दे । आखिर उन देशों में मुसलमानों का शासन हैं तो वो पीडित कैसे ? फिर उनके नाम का जिक्र बिल में हो ही नहीं सकता क्योंकि यह बिल तो इन देशों के पीडित अल्पसंख्यक समुदाय के लिए हैं । यह तो पीड़ितों को जुल्म से बचाने के लिए हैं तो इस पर आपत्ति क्यों ? यह उन पीड़ित लोगों के लिए हैं जो बदहाली में है और उनका भारत से कही ना कही कोई रिश्ता है । यह हिन्दू बहुल नेपाल और बौद्ध बहुल भूटान और म्याँमार के लोगों को नागरिकता की बात नहीं कर रहा हैं ।
क्या देश के मुस्लिम समुदाय को कोई दिक्कत होगी – इस बिल का देश के किसी भी व्यक्ति पर कोई प्रभाव नहीं होगा । यह ऐसे नहीं है कि भारतीय मुस्लिम समुदाय को निकालकर , पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिन्दू , सिख , जैन , बौद्ध और ईसाइयों को बसाया जायेगा । यह उनके नागरिकता देने की बात कर रहा हैं किसी की नागरिकता लेने की नही ।

इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी ?

दरअसल भारत के पड़ोसी मुस्लिम राष्ट्रों में मुसलमानों के अलावा अन्य समुदायों की हालत ख़राब है । पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दू और सिख लड़कियों को जबरन अपहरण करके उनके साथ बलात्कार और धर्म परिवर्तन की घटनाएं किसी से छिपी नहीं है । इन दोनों देशों में हिन्दूओं और ईसाइयों की जनसंख्या तेजी से घट रही हैं और इसका कारण इन समुदायों का जबरन धर्म परिवर्तन हैं । अफगानिस्तान में अन्य धर्मावलंबीयों की जनसंख्या मात्र 7628 रह गयी हैं जिनमें 500 सिख , 5000 हिन्दू और 2000 के करीब बौद्ध हैं । पाकिस्तान में 428 में से मात्र 20 मंदिर बचे हैं जबकि अफगानिस्तान में कोई मंदिर नहीं है । ऐसे में यह बिल बहुत जरूरी था और यह मानवाधिकार की रक्षा करता है ।

विपक्ष का मक़सद –

विपक्ष का मक़सद इस बिल को गलत तरीके से प्रचारित करके मुस्लिम समुदाय को भडकाना और देश में अराजकता की स्थिति बनाकर सत्ता हासिल करने के अलावा और कुछ भी नहीं है ।

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