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गौतम अडानी के बन्दरगाह से पकड़ी गयी ‘हेरोइन’ का समाचार क्यों दबाया गया?

मीडिया का बीभत्स चरित्र!

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

देश के मीडियातन्त्र की बेईमान नज़रों का जीता-जागता उदाहरण पिछले सितम्बर-माह में देखा गया था। घटना ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ चलानेवाले देश के अभूतपूर्व चाय-दुकानदार और वर्तमान में चौकीदार नरेन्द्र मोदी के गृहराज्य गुजरात की है। गुजरात में भुज से लगभग ५० किलोमीटर की दूरी पर स्थित कच्छ के पास एक बन्दरगाह है, जिसका नाम ‘मुन्द्रा पोर्ट’ है और वह नरेन्द्र मोदी के परमप्रिय व्यावसायिक मित्र गौतम अडानी की कम्पनी ‘अडानी ग्रुप’ का है।

गौतम अडानी

तारीख़ १६ सितबर, २०२१ ई० को ‘मुन्द्रा पोर्ट’ से अब तक की सर्वाधिक मात्रावाली ‘हेरोइन’ बरामद की गयी थी। दो कण्टेनरों में ३,००० किलोग्राम हेरोइन को छुपाकर भेजा गया था।

ऐसी ही घटना जून, २०२१ ई० में भी घटी थी; परन्तु उस बार हेरोइन के आयात-निर्यात करनेवालों ने डी० आर० आइ० (डायरेक्टरेट ऑव़ रेवेन्यू इण्टेलिजेंस– राजस्व आसूचना निदेशालय) और सीमाशुल्क अधिकारियों की आँखों में धूल झोंकने या फिर ख़ुद उन्हें अपनी आँखों में धूल झोंकवाने में कामयाबी पा ली थी। उल्लेखनीय है कि गौतम अडानी का ‘मुन्द्रा पोर्ट’ वैश्विक आयात-निर्यात के लिए चर्चित रहा है।

हम यदि ‘राजस्व आसूचना निदेशालय’ के तथ्योद्घाटन पर विश्वास कर सकें तो बताया गया है कि उक्त हेरोइन को आन्ध्रप्रदेश के विजयवाड़ा-स्थित कम्पनी ‘आशी ट्रेडिंग फ़र्म’ के नाम से आयात किया गया था, जिसके संचालक एक दम्पती है, जिनके नाम ‘सुधाकर’ और ‘वैशाली’ है, जिसे उस दम्पती ने ‘टेल्कम पॉवडर’ के नाम बताया था। आपको यहाँ जान लेना चाहिए कि ‘हेरोइन’ और ‘टेल्कम पॉवडर’ देखने में एक-जैसे ही लगते हैं। उस मादक पदार्थ को ‘टेल्कम पॉवडर’ के नाम से जिस ‘फर्म’ ने भेजा था, उसका नाम ‘हसन हुसेन लिमिटेड’ है, जो कन्धार (अफग़ानिस्तान) में स्थित है। उक्त हेरोइन की खेप कन्धार से ईरान और वहाँ से गुजरात में कच्छ-स्थित बन्दरगाह ‘कुन्द्रा पोर्ट’ पर पहुँचायी गयी थी। कथित दम्पती को गिरिफ़्तार कर लेने की सूचना भी प्रसारित कर दी गयी है।

ज्ञातव्य है कि जो मादक पदार्थ ‘हेरोइन’ पकड़ी गयी थी, उसकी बाज़ार में कुल क़ीमत २१ हज़ार करोड़ रुपये से भी अधिक की बतायी जा रही है। जैसे ही उस घटना की भनक लगी, ‘मुक्त मीडिया’ के वैचारिक सिपाही सक्रिय हो उठे, जबकि देश का मीडियातन्त्र कानों में रुई ठूँसे हुए दिख रहा था। ‘मुक्त मीडिया’ की सक्रियता का ही परिणाम और प्रभाव रहा कि प्रकरण विस्फोटक स्थिति में आ चुका था। विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए, अन्तत:, गौतम अडानी को अपना मौन तोड़ना पड़ा था और घटना के पाँचवें दिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि ‘टेल्कम पॉवडर’ के नाम से हेरोइन उनके बन्दरगाह से बरामद की गयी थी।

अब वह हेरोइन कहाँ है? इस प्रश्न का सटीक उत्तर किसी के पास नहीं है; क्योंकि सभी घटनाक्रम विश्वसनीय लगें ही, इस पर विश्वासपूर्वक कोई भी कथन नहीं किया जा सकता।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ अक्तूबर, २०२१ ईसवी।)