“पर्यावरण-प्रणालियाँ राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं”– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

“पर्यावरण के विषय में राष्ट्रीय सीमाएँ इतनी झीनी हो चुकी हैं कि स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व के मध्य का अंतर अब समाप्त हो चुका है। पर्यावरण-प्रणालियाँ राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं। आजकल विकास का अर्थ हो गया है, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन। भारत में यदि विकास-कार्यों को पर्यावरण से जोड़ा जाये तो भारी-भरकम क़र्ज़ लेकर चलायी जानेवाली बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाएँ घर-फूँक तमाशा देखने जैसी ही लगती हैं।”

उक्त विचार ‘सर्जनपीठ’ की ओर से ‘डॉयट-सभागार’, सिविल लाइंस, इलाहाबाद में आयोजित अध्यापक और सामाजिक कार्यकर्त्ता रणविजय निषाद की पर्यावरण-कृति ‘पर्यावरण-संचेतना’ के लोकार्पण-समारोह में अध्यक्षीय संभाषण करते हुए, भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने व्यक्त किये थे।

मुख्य अतिथि और नेहरू ग्रामभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० पारसनाथ पाण्डेय ने कहा,”हमारे पर्यावरण की बरबादी का मुख्य कारण यह है कि हमारे प्राकृतिक संसाधनों की हर रोज़ बढ़ती मात्रा अमीरों के उपभोग की सामग्री तैयार करने में झोंक दी जाती है। मनुष्य के कारनामों से प्राकृतिक जगत् का संतुलन बिगड़ गया है।”
विशिष्ट अतिथि और उपशिक्षानिदेशक, उत्तरप्रदेश महेन्द्र कुमार सिंह ने कहा,” रणविजय जी की कृति अध्ययन-अध्यापन तथा लेखन की दृष्टि से महत्त्व की है। आज जिस तरह से हर क्षेत्र में पर्यावरण का दोहन कर उसे संदूषित किया जा रहा है, वह महाविनाश का संकेत है।”

विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉयट के प्राचार्य कुबेर सिंह ने ‘पर्यावरण-संचेतना’ की उपयोगिता और महत्ता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के आरम्भ में अध्यक्ष, मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथिगण ने दीप-प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। रसराज अवनेंद्र पाण्डेय ने वेदपाठ किया। डॉयट की छात्राएँ– प्रेया, शिवानी, नन्दिनी, शुभि ने सरस्वतीवन्दना और स्वागतगान किया। समाजसेवी पप्पूलाल ने स्वागतभाषण किया, तत्पश्चात् रणविजय निषाद की पुस्तक ‘पर्यावरण-संचेतना’ का लोकार्पण किया गया। अध्यापक नीतू निषाद ने पर्यावरण-विषयक काव्यात्मक अभिव्यक्ति की थीं।

लेखक रणविजय निषाद ने अपने वक्तव्य में उक्त पुस्तक की लेखन-प्रक्रियाओं से अवगत कराते हुए, वर्तमानकालीन पर्यावरण-प्रदूषण पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर तलब जौनपुरी, जगन्नाथ शुक्ल, रविरंजन पाण्डेय, साकेत कुमार तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद, उर्वशी उपाध्याय, सुधा सिंह, सुनीता निषाद, रंजना, अरुण कुमार, प्रवीण कुमार सिंह, अंशुमान सिंह, गयादीन कैथवास, अश्विनी कुमार, आँचल चौधरी, ठा० रणंजय सिंह, चन्द्रप्रकाश, डॉ० अवधेश कुमार, दीपिका पाल, रोली मिश्र, आँचल चौधरी, शीलू गुप्ता, यशस्वी श्रीवास्तव, ज्योति अग्रहरि, रणमत सिं, माया देवी, प्रतिभा वर्मा-सहित शताधिक विद्यार्थी, अध्यापक तथा अन्य श्रोतागण उपस्थित थे।

सत्यम त्रिपाठी ने संचालन और अंकेश कुमार ने संयोजन किया था। समारोह का समापन ‘राष्ट्रगान’ से हुआ।
हरिलाल निषाद ने आभार-ज्ञापन किया।

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