काश कि हर लड़की दुआ करती कि उसको रावण सा भाई मिला होता

लेखक – सीतांशु त्रिपाठी, सतना मध्यप्रदेश

आज मैं उस समाज की बात कर रहा हूँ जहाँ कहा तो ये जाता हैं की लड़की लक्ष्मी का रूप होती है । लड़की देवी होती है । लड़की ये होती है । लड़की वो होती हैं । पर वास्तव में इस समाज में एक लड़की को कितना लक्ष्मी माना जाता है और कितना देवी की तरह पूजा जाता है वो लड़की ही जानती होगी । 

कुछ लोग ज्ञान देने आते हैं और कहते हैं कि जब कोई माँ या कोई दादी माँ अपनी बहू या बेटी को आशीर्वाद देती है तो यही कहती हैं कि खुश रहो तुम्हे बेटा हो । तो जब एक लड़की ही लड़की पैदा न होने की दुआ देती है तो समाज क्या करे ? ज्ञानी बाबा ने बराबर ज्ञान दे दिया पर ये सोचने की कोशिश नहीं की आखिर क्यों माँ ने और दादी माँ ने ये नहीं कहा कि बहू खुश रहो तुमको बेटी हो । और पता है बात माँ या दादी माँ की नहीं हैं कोई भी लड़की ये नहीं चाहेगी कि इस लक्ष्मी और देवी मानने वाले समाज में कोई और लड़की पैदा हो ।

इसकी वजह क्या हैं कभी फुर्सत मिले तो किसी लड़की से ही पूछना वो मेरे से बेहतर बता पायेगी । लेकिन मैं जितना जानता हूँ अगर उस हिसाब से बताऊं तो ऐसी लाखों वजह हैं । आज सिर्फ एक वजह की बात करता हूँ वह ये कि जब से लड़की पैदा होती हैं तो उसके जीवन पर बाप का या भाई का ही हुक़्म चलता है । कभी ये नहीं पूछा जाता कि बेटी तुमको क्या चाहिए ? अगर किसी लड़की ने अपने मन की करने की सोची तो ये समाज उसको आवारा और बदचलन का नाम दे देता है । कौन से स्कूल में पढ़ेगी ? कौन से कपड़े पहनोगी ? कितने समय घर आओगी ? ये सब बाप और भाई बताते हैं । पापा बहन बड़ी हो गई है । इसकी उम्र 18 हो गई है । अब इसकी शादी कर दो । हाँ बेटा मैं भी यही सोच रहा था । न तो बहन से ये पूछा कि बेटा तुम्हारे सपने क्या हैं ? तुम्हे बनना क्या है ? और न ही ये पूछा कि बेटा तुम्हे किससे शादी करनी हैं ? किसी गंवार किन्तु अमीर घर के लड़के से शादी कर दी जाती है । फिर या तो वह कुछ सालों में आत्महत्या कर लेती है या फिर अपनी माँ और दादी की तरह अपने बहू और बेटी को आशीर्वाद देती है । भगवान से हर रोज यही दुआ करती है कि हे ईश्वर किसी के घर लड़की पैदा न हो और शादी के पीछे ऐसे पड़ जाते हैं जैसे कि हर लड़की सपना हो । शादी करना तो बता दूँ कि किसी लड़की का सपना शादी करना नहीं होता । वो भी खुले आसमान में उड़ना चाहती है । वो भी अपने मन से जीना चाहती है । उसके भी कुछ सपने होते हैं ।

काश ! कोई उसकी सुनने वाला होता तो वो भी दुआओं में एक बेटी मांगती । पर वाह! भाई क्या कीमत चुकाते हो तुम उस राखी की जिसको बांधते समय हर लड़की यही मांगती है कि भाई मेरी रक्षा करना और मुझे खुश रखना । पर इस समाज में भाई तो कभी कुछ पैसे और कपड़े या कोई महंगा तोहफा देकर राखी की कीमत तुरंत ही चुका देता है । यही परम्परा है । काश कि हर लड़की दुआ करती कि उसको रावण सा भाई मिला होता ।

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