‘निर्वाचन आयोग’ की कार्यपद्धति न्यायपरक नहीं?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और कुछ आयुक्तों में सत्ताधारियों के प्रति जो निष्ठा दिखती आ रही है और जिस ‘निर्वाचन आयोग’ की कार्यपद्धति को लेकर मैं लगातार उसे न्याय के कटघरे में लाता आ रहा हूँ, उसकी वास्तविकता अब सामने आ चुकी है। निर्वाचन आयोग के सदस्यों का पारस्परिक ‘मतभेद’ और ‘मनभेद’ अब प्रत्यक्ष हो चुका है। एक आयुक्त सुस्पष्ट शब्दों में कहता है :– मुख्य चुनाव आयुक्त ने निर्देश किया है कि नरेन्द्र मोदी की चुनावी भाषण का ‘चित्रांकन और ध्वन्यांकन’ नहीं किया जायेगा, विशेषत: उनके ‘अवैध’ वक्तव्यों का। इसके अतिरिक्त सत्ताधारी दल के प्रति मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षधरता के अनेक आरोप हैं। ऐसा क्यों? यदि उस चुनाव आयुक्त का आरोप सत्य है तो इसकी जाँच कौन करेगा?

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १८ मई, २०१९ ईसवी)

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