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अशुद्धता के साथ हिन्दी का विस्तार औचित्यहीन है― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान’ (डाइट) की ओर से १० जनवरी को ‘विश्वहिन्दी-दिवस’ के अवसर पर संस्थान के सभागार मे व्याख्यान और कर्मशाला का आयोजन किया गया। आयोजन मे मुख्य अतिथि भाषाविज्ञानी एवं समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय थे। आरम्भ मे, मुख्य अतिथि ने दीप-प्रज्वलन कर, समारोह का उद्घाटन किया और सरस्वती के चरणो मे माला अर्पित किया। संस्थान की छात्राओं ने सरस्वती-वन्दना की। सामाजिक कार्यकर्त्ता और शिक्षक रणविजय निषाद ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए, विश्वहिन्दी-भाषा-आयोजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला था।

मुख्य अतिथि आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने अपनी कर्मशाला के अन्तर्गत संस्थान के सैकड़ों प्रशिक्षणार्थियों को एक-एक शब्द को व्याकरणस्तर पर विभाजित कर, उसमे निहित सन्धि, समास, धातुशब्द-रूप, उपसर्ग, प्रत्यय आदिक को समझाया और लिखाया। उन्होंने उन सामान्य शब्द-व्यवहार और वाक्यप्रयोग को सकारण अशुद्ध ठहराया, जिनका आज शिक्षाजगत् मे निस्संकोच प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “भले ही हम हिन्दी का विस्तार कर लें, फिर भी शुद्धता के साथ यदि शैक्षणिक संस्थानो मे उसका व्यवहार नहीं होता है तो वह विस्तार औचित्यहीन है।”

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने शताधिक शुद्ध शब्दों पर सोदाहरण प्रकाश डाला। उन्होंने फूल-कली का विभेद, महोदय का प्रयोग-रूप, जन्मदिन-जन्मतिथि, परिक्षा-परीक्षा, और, एवं, तथा, नकारात्मक-सकारात्मक शब्द-संगति, ध्वनि और मात्राविज्ञान, संख्यात्मक उच्चारण, ज़िला-जिला, मिष्टान्न-मिष्ठान्न, आरोपी-आरोपित, विज्ञान-विज्ञानी, रंग-रँग, सन्सकृत-सम्सकृत, आलोचना-आलोचक,समालोचना-समालोचक, समीक्षा-समीक्षक, चिह्न-चिन्ह, चाहिए-चाहिये, विविध-विभिन्न, योजक-चिह्न, निर्देशक-चिह्न, कोष्ठक-प्रयोग, उपविरामचिह्न, एकल-युगल उद्धरणचिह्न, सम्बोधनचिह्न, विवरणचिह्न, लघ्वक्षर, प्रावधान-प्रविधान, बड़ा-बहुत, यें-एँ, पुनरुक्ति-दोष, नुक़्त:, अनुस्वार-अनुनासिक, अल्पप्राण, महाप्राण, अन्त:स्थ व्यंजन, आगत चिह्न आदिक का वाक्य मे प्रयोग करते हुए, विधिवत् समझाया था। प्रशिक्षणार्थियों ने प्रश्न और प्रतिप्रश्न किये थे, जिनके उत्तर-प्रत्युत्तर आचार्य ने दिये थे। सभी छात्र-छात्राओं तथा अध्यापकों ने ध्यानपूर्वक कर्मशाला मे सहभागिता की थी।

इससे पूर्व प्रवक्ता डॉ० राजेशकुमार पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत किया।

प्रवक्ता रेखा राम ने कहा, “आज वैश्विक पटल पर हिन्दी का तीव्र गति मे प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।”

सहायक प्राध्यापक डॉ० रमेशकुमार सिंह ने कहा, “हमारी हिन्दी अब क़ानून की भाषा बन चुकी है और उसका अन्य क्षेत्रों मे भी विस्तार हो रहा है।”

वरिष्ठ प्रवक्ता आलोक तिवारी ने कहा, “विश्वस्तर पर हिन्दी का विकास हिन्दी की समृद्धि के प्रति हमे आश्वस्त करता है।”

अन्त मे, वरिष्ठ प्रवक्ता शिवनारायण सिंह ने अभ्यागतगण के प्रति अपना अभार-ज्ञापन किया।

रामाश्रय यादव ने शाइराना अन्दाज़ मे कार्यक्रम का संचालन किया। संस्थान के उपनिदेशक एवं प्राचार्य राजेन्द्र प्रताप ने समारोह का संयोजन किया।