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जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन सम्पन्न

  • फसल अवशेष में आग लगाना दण्डनीय अपराध हैः-मुख्य विकास अधिकारी
  • किसान मृदा परीक्षण करा कर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करेंः-आकांक्षा राना

जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देशन में प्रमोशन आफ एग्रीकल्चरल मैकेनाईजेशन फार इन-सीटू, मैनेजमेन्ट के अन्तर्गत जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन संभागीय कृषि शोध केन्द्र परिसर पर मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना की अध्यक्षता में किया गया। गोष्ठी में लगाई गई प्रदर्शनी मे अनुदान पर वितरित किये जाने वाले कृषि यंत्रों का मुख्य विकास अधिकारी ने अवलोकन किया। उन्होंने फार्म मशीनरी बैंक के लिए चयनित एफ0पी0ओ0 श्री भगवानदीन प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड के निदेशक चमन देव को टैªक्टर की चाबी प्रदान की गयी।

मुख्य विकास अधिकारी ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये कहा कि किसान मृदा परीक्षण करा कर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें और मिश्रित खेती के अन्तर्गत गेंहूॅ- धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, फलों और सब्जियों तथा पशुपालन को अवश्य करें। फसल अवशेष में आग लगाने के बजाय उसे खेत में ही सड़ाने या गौशाला को दान देने और बदले में गोबर की खाद प्राप्त करने की सलाह दी, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढेगी और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के द्वारा निर्धारित फसल अवशेष में आग लगाने के दण्ड से भी बच सकेंगे। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा देसी योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षार्थियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किये गये। गोष्ठी में उप कृषि निदेशक डा0 नन्द किशोर ने कृषकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि फसल अवशेष में आग लगाना दण्डनीय अपराध है और 02 एकड़ तक जोत वाले किसानों पर रू0/-2500, दो से पांच एकड़ तक रू0/-5000 तथा 05 एकड़ से अधिक जोत वाले कृषकों पर रू0/-15000 के अर्थदण्ड के साथ-साथ प्रथम सूचना रिपोर्ट कराने का प्राविधान कानून में है। उन्होंने कहा कि आसमान में उपग्रह के द्वारा चौबीस घण्टे निगरानी की जाती है जिसके आधार पर यदि कोई किसान द्वारा फसल अवशेष में आग लगाई जाती है तो उसका ग्राम व खेत का खसरा नम्बर भी उपग्रह रिमोट सेन्सिंग के माध्यम से प्रशासन और पुलिस को प्राप्त हो जाता है जिसके आधार पर दण्ड की कार्यवाही तहसील, राजस्व, पुलिस, ग्राम्य विकास तथा कृषि विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियोें द्वारा की जाती है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के व्यापक प्रचार प्रसार के लिये 24 अगस्त से 03 सितम्बर तक विकास खण्ड/ग्राम स्तर पर गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। किसान भाई फसल अवशेष खेत में सड़ाने के लिये मनरेगा योजनान्तर्गत गड्ढे बनवाकर वेस्ट डिकम्पोजर का प्रयोग कर खाद तैयार कर सकते है।

गोष्ठी में कृषि विज्ञान केन्द्र के डा0 रामप्रकाश, डा0 दीपक मिश्र, डा0 सी0पी0एन0 गौतम तथा डा0 डी0बी0 सिंह ने भी कृषि यंत्रीकरण तथा उन्नत कृषि तकनीकी की जानकारी कृषकों को दी। इस अवसर पर उपस्थित उपायुक्त मनरेगा, जिला कृषि अधिकारी, पशुचिकित्साधिकारी, कृषि रक्षा अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी, सहायक निबन्धक सहकारिता, जिला उद्यान अधिकारी तथा सहायक निदेशक मत्स्य ने भी अपनी-अपनी योजनाओं की जानकारी दी। गोष्ठी के अन्त में डा0 नन्दकिशोर उप कृषि निदेशक द्वारा सभी प्रतिभागी अधिकारियों तथा कर्मचारियों व किसानों एवं मीडिया कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।