नवरात्रि का पंचम दिवस : पद्मासना देवी :- स्कंदमाता

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” कवि, साहित्यकार


नवरात्रि के पांचवे दिन माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप पद्मासना देवी स्कंदमाता की उपासना पूजा की जाती है। शास्त्रों में पांचवें दिन का पुष्कल महत्व बताया है। इस चक्र में अवस्थित मन वाले साधक माँ के अनन्य भक्तों की समस्त बाह्य क्रियाओं एवम चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है।यह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर हो जाते हैं। साधक का मब समस्त लौकिक सांसारिक मायिक बंधनों से विमुक्त होकर पद्मासना माँ स्कंदमाता के दिव्य स्वरूप में पूर्णरूप से मग्न हो जाता है। साधक को सब जगह से मन को हटाकर स्कंद माता का ध्यान करना चाहिए।
मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुख प्रदान करती है। माँ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से प्रसिद्ध हुए। ये देवासुर संग्राम के दौरान सेनापति बनाये गए। देवताओं के सेनापति स्कंद कुमार को पुराणों में शक्ति कहकर कुमार कहकर इनकी महिमा को गाया। इन्हीं स्कंद कुमार यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण माँ दुर्गा के इस रूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाने लगा।

स्कंदमाता के चार भुजाएं है। ये चार भुजाधारी माँ का दिव्य स्वरूप है। इनके दाहिनी ओर की नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें कमल पुष्प है। बायीं तरफ की भुजा में जो वर मुद्रा है तथा नीचे वाली भुजा में कमल है। इनका वर्ण शुभ्र है। ये कमलासनी कहलाती है। कमल के आसन पर विराजती है। इसी कारण पद्मासना कहते हैं।
सूर्यमण्डल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपढक अलौकिक तेज व कांति से सम्पन्न होता है। यह अलौकिक मण्डल उसके चारों ओर व्याप्त रहता है।
साधक को एकाग्र भाव से मन को पवित्र रखकर माँ की शरण मे आना चाहिए। इस भवसागर से पार दुखों से छुटकारा व मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग सुलभ बनाने के लिए स्कंद माता के शरण मे आना ही होगा।
“या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः।।”
हे माँ सर्वत्र विराजमान औऱ स्कंदमाता के रूप में माँ अम्बे आपको मेरा बारम्बार प्रणाम है मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद जी बालकरूपी बन गोदी में बैठ जाते हैं। यह माँ दुर्गा की पाँचवी शक्ति है।
मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है स्कंदमाता की कृपा से।
“सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्वनि।।’
पहाड़ों में रहकर सांसरिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वाली स्कंदमाता। सब भक्तों का कल्याण करती है।

स्कंदमाता कमलासनी कल्याण करती है।
मोक्ष प्रदायनी माता सुख वैभव भर देती है।।


98,पुरोहित कुटी श्री राम कॉलोनी भवानीमंडी
जिला झालावाड़
राजस्थान

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