सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

अर्थव्यवस्था की धीमी हुई रफ्तार, वित्त मंत्री ने ख़राब मानसून को ठहराया ज़िम्मेदार

राज चौहान-


भारत की अर्थव्यवस्था पर नज़र डालें तो कंस्ट्रक्शन में बीते बरस ग्रोथ रेट 1.7 फीसदी रही, जो उसके पहले जो साल बीता 5 फीसदी थी।

अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में  तेज़ी से होने वाली गिरावट भारत को जोर का झटका धीरे से देना जैसी ही है।

बात करे अगर खनन क्षेत्र में बीते बरस तो ग्रोथ रेट महज 1.8 फीसदी रही, जो उसके पहले बीते बरस में 10.5 फीसदी थी।

एक सवाल यहाँ भी खडा़ होता है, क्या लगातार चल रहे उत्तर प्रदेश में खनन पर रोकथाम का असर भी अपना प्रभाव दिखा रहा है?

अब बारी जीडीपी की……

आपको बताते चले कि साल दर साल भारत मे जीडीपी का क्या रहा हाल

2014-15 में भारत की जीडीपी 7.5% रही, जबकि 2015-16 में 0.5 की बढ़त के साथ 8% और 2016-17 में 7.1 ही रह गई तो कहीं न कहीं हाल बेहाल ही नज़र आ रहा है।

 

वित्तीय वर्ष 2016-17 में, कृषि विकास दर में क्या रही तैयारी….

2016-17 की पहली तिमाही 2.5% तो वंही दूसरी तिमाही 4.1%, तीसरी तिमाही6.9% और चौथी तिमाही5.2 % रही।

 

कुछ सवाल जिनके नही हैं, साफ साफ जवाब……..

१. कृषि निर्यात 2013-14 में 43.2 विलियन डॉलर से घटकर 2016-17 में 33.8 बिलियन डॉलर तक तक पहुंच गया?

आखिर निर्यात घटने का ठीकरा किसके सर?

 

2. रोजगार का संकट भारत के सर पर खुलेआम मँडरा रहा है।

2009-15 में तक़रीबन 8 लाख 70 हजार मिला था, वंही 2016 में सिर्फ 1 लाख 25 हजार नए रोजगार पैदा हुए।

यानी रोजगार के अवसर में गिरावट का संकट

आख़िर क्या है वज़ह?

 

3. एनपीए 7 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया है और सिर्फ बीते एक साल में एक लाख करोड़ रुपये बढ़ गया।

आख़िर कैसे?

 

4. वित्त मंत्री अरुण जेठली का कांग्रेस पर क्या है निशाना?