मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

Ring of Fire (सूर्य ग्रहण) के अध्ययन हेतु कोयम्बटूर में आयोजित कार्यशाला में हरदोई से शामिल हुए पीबीआर इण्टर कॉलेज के प्रदीप नारायण मिश्र

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’

वर्ष 2019 के अन्तिम सूर्यग्रहण को देखने व इस खगोलीय घटना के अध्ययन हेतु “विज्ञान प्रसार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार)” द्वारा कोयम्बटूर में दो दिवसीय (25 व 26 दिसंबर 2019) कुंडलाकार सूर्य ग्रहण कार्यशाला (Annular Solar Eclipse Workshop) का आयोजन किया गया।

इस प्रतिष्ठित कार्यशाला में विज्ञान प्रसार द्वारा इस अद्भुत खगोलीय घटना का अवलोकन व उस पर अध्ययन हेतु देश के विभिन्न प्रांतो से लगभग 200 विज्ञान शिक्षकों व खगोलविदों को आमंत्रित किया था, जिसमें प्रतिभाग करने का पीबीआर इण्टर कॉलेज तेरवा गौसगंज के अध्यापक रसायन शास्त्र के प्रवक्ता प्रदीप नारायण मिश्र ने भी शिरक़त की । कुण्डलाकार सूर्य ग्रहण के दीदार हेतु कोयम्बटूर से लगभग 27 किमी दूर उपयुक्त स्थल पर कार्यशाला का आयोजन होना सुनिश्चित था परंतु आसमान में बादल होने के कारण पूरी टीम को चार बस व कार द्वारा केरल बार्डर पर जाना पड़ा । रास्ते में ही ग्रहण के अद्भुत नजारे का दर्शन प्राकृतिक फिल्टर द्वारा प्राप्त होना शुरू हो गया ।

नोट- “ग्रहण को नंगी आंख से न देखें । आसमान में बादल के कारण प्रकाश की तीव्रता लगभग लाख गुना कम हो गयी थी । इस कारण सभी बीच-बीच में प्राकृतिक फिल्टर द्वारा ग्रहण को देख सके ।”

चंद्रमा द्वारा सूर्य को पूरा ढक न पाने से सूर्य की परिधि आग के छल्ले (Ring of Fire) जैसी दिखी । विभिन्न टीमों ने विभिन्न उपयुक्त स्थानों से इस अद्भुत व अविस्मरणीय नजारे का टेलीस्कोप, गाॅगल आदि द्वारा दीदार के साथ इस घटना का वैज्ञानिक अध्ययन भी किया।

अगला कुंडलाकार सूर्य ग्रहण उत्तर भारत में 21 जून को होगा। इस आगामी अद्भुत खगोलीय घटना को देखने हेतु डिजाइन किए गये गागल,पिन होल कैमरा,दर्पण द्वारा सूर्य के प्रतिविम्ब को प्रक्षेपित करके, सोलर फिल्टर लगे टेलीस्कोप आदि द्वारा देखा जा सकेगा। सूर्य ग्रहण कभी भी फोटो फिल्म, सीडी, डीवीडी रोम, एक्स रे फिल्म आदि से न देखें । ये सूर्य से आने वाले विकिरण को रोक नहीं पाते और जिससे हमारी आंखो को नुकसान पहुंच सकता है।