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‘बालिका-दिवस’ के नाम पर ‘समाज’ के साथ छलावा!

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज (२५ जनवरी) उत्तरप्रदेश में ‘बालिका-दिवस’ के नाम पर एक नौटंकी शुरू की गयी है। अब पर्दा भी गिराया जा चुका है और ‘कल’ से नित्य क्रमवाली बेशर्मी, कर्त्तव्यहीनता, रिश्वतख़ोरी, बालिकाओं, किशोरियों, युवतियों तथा शेष अवस्था-वर्गवाली महिलाओं के साथ थानों में अभद्रता और समाज में दरिन्दगी की जायेगी; ज़िला-प्रशासन की ओर से प्रत्येक स्तर पर अपमानित की जायेंगी; परन्तु बालिका-दिवस पर जिन ‘छद्म बालिकाओं’ की आज ताजपोशी की गयी है, उनकी ज़बाँ तक नहीं हिल सकती।

कुछ ज़िलों में ज़िला-प्रशासन और पुलिस-प्रशासन की ओर से किसी छात्रा को एक दिन के लिए डी०एम० की कुर्सी तो पुलिस अधिकारी की वर्दी और कुर्सी दे दी गयी थी। एक दिन का अर्थ है, चौबीस घण्टे के लिए। अब गम्भीर प्रश्न यह है :– कथित अधिकारी बनायी जानेवाली बालिकाएँ कितने घण्टे तक अधिकारी का चोला पहने रहीं; कुर्सियों पर बैठी रहीं तथा सम्बन्धित क्षेत्रों में निरीक्षण करतीं देखी गयीं?

अब प्रश्न यह है कि एक दिन के उक्त ‘छद्म’ अधिकारियों को ‘निर्णय’ करने और लिखित आदेश करने का अधिकार दिया गया है? यदि हाँ, तो उस आदेश का प्रभाव क्या रहा? इन्हें सार्वजनिक किया जाये।

एक दिन के लिए ‘दिखावे’ के तौर पर, विशेषत: जिन छात्राओं को पुलिस-अधिकारी, ज़िलाधिकारी आदिक बनाकर कुर्सी पर बैठाया जा रहा है, उन सभी ने जनहित में ऐसा कौन-सा निर्णय और आदेश किया था, जिनको उसी दिन से हमेशा के लिए लागू किया गया हो।

२५ जनवरी के समाचारपत्रों में एक समाचार छपा था :– ‘थानेदार’ बेटी ने हेलमेट नहीं पहनने पर पिता का चालान काटा’। यह समाचार इटावा के थाना ‘ऊसराहार’ का है। प्रथम दृष्ट्या यह सुस्पष्ट हो जाता है कि पूर्व-नियोजित ढंग से उस थानेदार ने स्वयं का चालान कटवाया था। उस कथित थानेदार की बेटी को उसका ‘बाप’ ही मिला था।

प्रश्न है, ‘बालिका’ के नाम पर जिन ‘किशोरियों’, ‘तरुणियों’ तथा युवतियों को ‘एक दिन का बादशाह’ बनाने का जो खेल दिखाया गया था, उनमें से कितनों ने सम्बन्धित थानाक्षेत्रों के अन्तर्गत सतायी जा रहीं और प्रताड़ित की जा रहीं महिलाओं से सम्पर्क किया था? इस विषय को समाचारपत्र-संवाददाता क्यों नहीं बता रहे हैं? किसी भी लड़की में इतना साहस था कि वह “डंके की चोट पर” कह सके :– आज से मैं आदेश जारी करती हूँ, मेरे थाने में आये हुए हर प्रताड़ित व्यक्ति की ‘एफ०आई०आर०’ लिखी जायेगी। ज़िलाधिकारी के रूप एक दिन के लिए कुर्सी पायी किस ‘बालिका’ ने आदेश जारी किया :– आज से शिक्षा-विभाग, डी० एम०-कार्यालय, कचहरी, तहसील, थाना, ब्लॉक, टाउन एरिया, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, बिजली-विभाग, जलकर-विभाग आदिक में यदि कोई किसी भी काम को करने के लिए रिश्वत माँगता हो तो उसकी सूचना सीधे ज़िलाधिकारी को अमुक मोबाइल नं०/ ह्वाट्सऐप पर भेजी जाये।

बेशक, एक उद्देश्य पूरा हो गया; और वह कि चमड़े की पीठ ठोंकी जा रही है; आत्म चित्रांकन (सेल्फ़ी) का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है; अख़बारवालों को एक आदर्श मसाला मिल गया। इससे अधिक कुछ नहीं।

धिक्कार है, ऐसे आदर्शवाद को!

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २५ जनवरी, २०२१ ईसवी।)

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