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भगवान विष्णु के सप्तम अवतार : रघुकुल शिरोमणि श्रीराम

भये प्रगट कृपाला दीन दयाला

भगवान श्रीराम विष्णु के सातवें अवतार हैं।इन्हें श्रीरामचन्द्र भगवान के नाम से जाना जाता है।रामायण में वर्णित है कि इनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ जी के घर हुआ था। इनकी माता कौशल्या थी। श्रीराम के जन्म की कथा है कि अयोध्या के सूर्यवंशी राजा चक्रवती सम्राट दशरथ ने पुत्र की कामना से एक यज्ञ कराया जिसे कामेष्टि यज्ञ कहा जाता है।जिसके फलस्वरूप उनके पुत्रों का जन्म हुआ था। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुुुघ्न चार भाई थे।

हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की मवमी तिथि को श्रीराम नवमी आती है जिसे देश विदेश में मनाई जाती है।श्रीराम जी का जीवनकाल व पराक्रम बाल्मीकि रामायण में वर्णित हैं। रामायण में जब रावण सीता का हरण कर लंका ले गया तब भगवान राम ने समुद्र पार करने के लिए राम सेतु बनाया था। महाकवि तुलसीदास जी ने महाकाव्य रामचरित्रमानस लिखा।
भगवाब श्रीराम का परिवार आदर्श भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता है । श्रीराम की प्रतिष्ठा मर्यादा पुरूषोत्तम के नाम से है। श्रीराम ने मर्यादा का पालन करने के लिए राज्य मित्र माता पिता भाई यहाँ तक कि पत्नी का भी साथ छोड़ दिया था।भारत सहित सारा विश्व श्रीराम को मानते हैं राम ही रक्षक है।

राजा जनक की कन्या सीता से श्रीराम का विवाह हुआ था। सीता स्वयम्बर ने उन्होंने शिवजी का धनुष भंग कर दिया था।शर्त के अनुसार भगवान ने काम किया था। परशुराम जी क्रोधित होकर आए बाद में पता चला कि ये विष्णु के सप्तम अवतार है उन्होंने भगवान को वन्दन किया।

राम रघुकुल में जन्में जहाँ की रीति है प्राण जाए पर वचन न जाये। उन्होंने पिता के आदेश को माना और वन गमन किया।
कितने ही पवित्र तीर्थ स्थलों पर दर्शन किये। पवित्र नदियों में स्नान किया। ऋषि-मुनियों के दुःख दूर किये उनकी असुरों से रक्षा की। कितने ही मायावी राक्षसों का वध किया। राम ने शबरी के जूठे बेर खा कर उनका आँगन पवित्र किया। मान बढ़ाया। देवी अहिल्या का उद्धार किया।

लंका में श्रीराम भक्त वीर हनुमान जी ने लंका दहन किया। राम रावण युद्ध हुआ। असत्य रूपी का वध हुआ। केवट का उद्घार किया प्रभु श्रीराम ने । उसकी नाव में बैठ गंगा पार की।
बन्दर भालुओं की सेना रावण की सेना पर भारी पड़ी। कुम्भकर्ण मेघनाथ सहित कई राक्षस मारे गए । रामकथा में वीर जटायु का अनुपम स्थान है तुलसी ने जटायु को बड़भागी कहा। इस प्रकार जटायु का सम्मान किया। भगवान राम का जीवन उनकी लीलाएं व्यक्ति को जीवन निर्माण की कला सिखाती है। राम जिनके आदर्श हैं। वे निरन्तर प्रगति करते रहते हैं।
रमन्ते योगी अस्मिन सः रामः
जिसमे योगी रमण करते हैं वे राम है। राम हर घट में रहता है।मोहें कपट छल छद्म न भावा। श्रीराम कहते हैं निर्मल मन वाला ही मुझे प्राप्त कर सकता है मुझे कपट छल छद्म अच्छे नही लगते। अतः सम्पूर्ण भावों से श्रीराम की शरणागत हो जाओ जैसे विभीषण हुआ था । फिर श्रीराम उस साधक का पूरा ध्यान रखते हैं।

भगवान राम की सेना में नल नील जाम्बवन्त हनुमान सुग्रीव बहुत बलशाली बुद्धिमान थे जिन्होंने सेना को संगठित कर लंका पर आक्रमण किया और असुरों का विनाश किया।
ताड़का वध बाली वध भगवान ने किया।

अयोध्या में शीघ्र ही भगवान राम का विश्व प्रसिद्ध मन्दिर बनने जा रहा है। यह सनातन धर्म की सबसे बड़ी जीत है। आज सभी गायें “भये प्रगट कृपाला दीन दयाला कौसल्या हितकारी।”

डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
भवानीमंडी