सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

सभी दलों ने जीएसटी को ऐतिहासिक करार देते हुए इसका समर्थन किया

देश के सबसे बडे आर्थिक सुधार माने जाने वाले जीएसटी को लागू करने की दिशा में देश एक कदम और आगे बढ़ गया है। जीएसटी से जुड़े चारों विधेयकों को लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद राज्यसभा ने भी इसे हरी झंडी दे दी है।
गुरुवार को राज्यसभा में चारों विधेयकों पर हुई लंबी बहस के बाद टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन ने संशोधन पेश किया जिसे राज्यसभा ने खारिज कर दिया। हालांकि चर्चा के दौरान टीएमसी समेत सभी दलों ने जीएसटी को ऐतिहासिक करार देते हुए इसका समर्थन दिया। कांग्रेस ने तो बिल के समर्थन में अपने संशोधन भी वापस ले लिए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चर्चा का जवाब देते हुए GST के फायदे गिनाए। वित्तमंत्री ने GST एक क्रांतिकारी बिल बताते हुए कहा कि ये यह सभी को फायदा पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी में संघीय ढांचे का खास ध्यान रखा गया है ताकि राज्यों और केंद्र के बीच टकराव न हो। वित्त मंत्री ने कहा कि रियल इस्टेट की जीएसटी में लाने पर अंतिम फैसला नहीं हुआ और राज्य इस पर बाद में फैसला करेंगे। राज्यसभा से पारित होने के बाद चारों विधेयकों यानी केन्द्रीय वस्तु एवं सेवाकर विधेयक यानी सीजीएसटी , एकीकृत वस्तु एवं सेवाकर विधेयक यानी आईजीएसटी , संघ शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवाकर विधेयक यानी यूटीजीएसटी और राज्यों के मुआवजे को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

इसके बाद देश के सभी राज्य स्टेट जीएसटी विधेयक पास करेंगे और फिर पूरे देश में लागू होगी एक राष्ट्र एक टैक्स व्यवस्था। इस व्यवस्था से केन्द्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाले वैट सहित कई अन्य कर जीएसटी में शामिल हो जाएंगे। जीएसटी व्यवस्था में कर की दरों की बात करें तो पांच तरह की हैं। शून्य, पांच बारह अठारह और 28 प्रतिशत। खाने-पीने की अहम चीजों पर 0% टैक्स होगा जबकि नुकसानदेह या लक्जरी वाली चीज़ों पर अधिक टैक्स रखा गया है। सरकार जीएसटी को एक जुलाई 2017 से लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे न केवल आम लोगों को बल्कि कारोबारियों को काफी फायदा होगा।