झूठ का आचरण व्यक्ति को पतित कर पाप की ओर ले जाता है : अनिल शास्त्री

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’

ठकुरीखेड़ा नयागांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक पूज्य आचार्य श्रद्धेय अनिल शास्त्री जी ने महाभारत के उत्तरार्ध में वर्णित राजा परीक्षित को दिए गए शाप से सम्बन्धित पाप और भोग की व्याख्या की ।

मल्लावाँ परिक्षेत्र के ठकुरीखेड़ा गाँव में सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य कथा का मनोहारी आयोजन किया जा रहा है । कथा का दूसरा दिन था । नैमिषारण्य से पधारे प्रख्यात कथावाचक अनिल शास्त्री जी महाराज ने रसमयी वाणी में महाभारत का वर्णन करते हुए राजा परीक्षित को दिए गए शाप तक की कथा श्रद्धालुओं व श्रोताओं को सुनायी । आचार्य प्रवर ने कहा कि मिथ्याचरण व कपटाचार मानव को दानव बना देते हैं । झूठ का आचरण व्यक्ति को पतित कर पाप की ओर ले जाता है । इसलिए सभी को असत्यवादिता का त्याग कर नर्क के गर्त में जाने से बचने का प्रयास करना चाहिए ।

ठकुरीखेड़ा गाँव में आध्यात्मिक संसार की रचना आदरणीया माताश्री सरोजनी द्विवेदी, भाई आनन्द द्विवेदी, भाई आलोक द्विवेदी, शक्ति स्वरूपा मयंका आनन्द द्विवेदी व शिवा आलोक द्विवेदी ने की है । श्रीमद्भागवत महापुराण के पावन पाण्डाल परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु परमात्मा के गुण-नाम का श्रवण करते हुए अध्यात्म सुख का आनन्द उठाते हुए ज्ञान पिपासा का शमन रहे हैं ।

卐 हरि ॐ तत्सत् 卐

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