सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

पाठशाला– एक दृष्टि मे

◆ पाठशाला उचित-अनुचित का ज्ञान और भान कराती है।
◆ पाठशाला मनुष्यता सिखाती है।
◆ पाठशाला अक्षरज्ञान से परिचित कराती है।
◆ पाठशाला ‘सामान्य’ शिक्षा से लेकर ‘विशेष’ शिक्षा तक का बोध कराती है।
◆ पाठशाला जीवन-अनुभव का विस्तार करती है और उसमे गहनता लाती है।
◆ पाठशाला जीवन जीने की कला सिखाती है।
◆ पाठशाला जीवन को अनुशासित करती है।
◆ पाठशाला नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करती है।
◆ पाठशाला ज्ञान के उत्तुंग शिखर पर समासीन करती है।
…… तो आइए! पाठशाला मे प्रवेश करें।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ सितम्बर, २०२२ ईसवी।)