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हे प्रकृति! अब करो उद्धार

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

समय आया, कर विचार।
देश की जनता है लाचार।
समय-बाण से बेधो इतना,
राजनीति बदले आचार।
खद्दर शर्म से पानी-पानी,
नहीं कहीं सुख का आधार।
महँगाई से त्रस्त है जनता,
सरकारें धरती पर भार।
नेताओं से त्रस्त है जनता,
हे प्रकृति! अब करो उद्धार।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ जुलाई, २०२१ ईसवी।)