सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

ज़रूर उड़ेगी लड़की

सौन्दर्या नसीम-

अफ़ग़ानिस्तानी-हिंदुस्तानी        संस्कृति की कड़ी

बदज़बान हो गई है लड़की
बोलती बहुत है
सदियों पहले
ज़बान पर जड़ दिए गए ताले की
मिल जाए चाबी तो..
और क्या होगा…?
शबोरोज़
मुसलसल
बड़बड़ाती ही मिलेगी लड़की।

खुल गए हैं
जाने कब से बँधे हुए हाथ-पाँव भी…
लगा देना चाहती है
एक्सीलेटर पर पाँवों का पूरा ज़ोर…
ख़त्म कर देना चाहती है
हाथों की पूरी जकड़न…
नहीं भरता जी 180 से
पहुँच जाती है सीधे 360 डिग्री पर
तोड़ देती है स्टियरिंग
भिड़ जाती है आँखें मूँद
दुश्मन के दरवाज़े पर

बहुत कुछ दरक जाता है
पाँवों की हड्डियाँ उसके भी
चटखती हैं पर…
उठ खड़े होने से बाज़ नहीं आती।

नहीं…अदावत नहीं है उसे किसी से
ख़ुद के भीतर के
दुश्मन की तलाश में है वह तो…

रोज़ अलस्सुबह
छत की आख़िरी मंज़िल पर खड़ी हो
परिंदे निहारती है
हवा में हाथ लहराती है
उड़ना चाहती है आसमान में

उड़ेगी…ज़रूर उड़ेगी लड़की…!

किसी फाइटर प्लेन की आवाज़
कान के पर्दों पर दस्तक देती है…
गूँज उठती हैं हज़ार आवाज़ें
आसमानी उड़ानों की…

ग़ज़ब है लड़की
सारे शोर को जज़्ब करती है
और..
गुनगुनाने लगती है
ज़िंदगी का कोई नग़मा
आवाज़ों को जोड़-गाँठकर
खड़ा करती है
मुहब्बत की मूसीक़ी का कोई मजस्समा!!