सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की कर्मशाला रायबरेली (उत्तरप्रदेश) से लातूर (महाराष्ट्र) की ओर

२५ सितम्बर से २८ सितम्बर तक की अवधि एक शैक्षिक, किन्तु कलात्मक संस्मरण की रचना कराने के प्रति आग्रहशील है। प्रयागराज से इन्दौर और इन्दौर से हैदराबाद, तदनन्तर (‘तद्न्तर’, ‘तद्नन्तर’, ‘तदन्तर’ अशुद्ध हैं।) गन्तव्य लातूर (महाराष्ट्र) तक के आकाशमार्ग और सड़क-मार्ग की मिश्रित यात्रा सुखद रहेगी और हमारे वहाँ के विद्यार्थियों और अध्यापकों को आश्वस्त करती भी।

इतना ही नहीं, इतिहास और कीर्तिमान का संयोग भी प्रबलतर लक्षित हो चुका है, जिसके केन्द्र मे ‘भाषिक संचेतना का उद्गम और संवर्द्धन’ अपनी सम्पूर्ण आभा के साथ सम्बद्ध विद्यार्थियों और अध्यापकों की अन्तश्चेतना को जाग्रत् कर रहा है।