ओमनगर में ग्राम समाज की जमीन पर बने मकानों को गिराया गया, खुले आकाश नीचे ओमनगर के वाशिंदों ने गुजारी रात 

करीब सौ वर्षों से ग्राम समाज की जमीन पर आशियाना बना चुके लोगों का कब्जा हटवा दिया गया। जिससे लोगों में बेहद नाराजगी है। वहीं कई ऐसे सवाल ड्टाी हैं जो लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर रहें हैं। आशियाना ढह जाने के बाद लोगों ने अपने नन्हे मुन्ने बच्चों के साथ खुले आकाश के नीचे लोगों ने रात गुजारी। वहीं बवाल होने के डर से पुलिस पहरा डाले हुए है। आला अफसर भी पल पल पर नजरें बनाए हुए है।
कोतवाली देहात के ओमनगर में अवैध तरीके से ग्राम समाज की जमीन पर बने मकानों को ढाहने के बाद से अफसरों ने भी अपना पड़ाव डाल रखा है। वहीं ओमनगर के लोग पल पल पर  विरोध जताना शुरू कर देते हैं। हालांकि पुलिस उनको किसी न किसी तरह से समझा बुझाकर कानून का आइना दिखाकर मामले को शान्त करने में लगी हुई है। इस व्यवस्था को देखकर हर किसी को इस तरह से आशियाना उजाड़ने की बात को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
दूसरे दिन सोमवार को ड्टाी ओमनगर में सीओ सिटी विजय राना, हरियावां सीओ ममता कुरील, नायब तहसीलदार कोतवाली देहात प्रड्टाारी एसआई ब्रजेश सिंह सहित टड़ियावां पुलिस सुरसा, सहित कई थानों की पुलिस डटी हुई है। वहीं इस पूरे मामले पर एलआईयू ड्टाी अपनी नजर बनाए हैं।

सड़क के किनारे गलियों में पड़ा घरेलू सामान 


अतिक्रमण हटने के बाद बेघर हुए लोगों का घरेलू सामान सड़क के किनारे या फिर गलियो ंमें पड़ा हुआ है। कहीं कहीं पर ओमनगर के लोगों ने अपना सामान चारपाईयों पर रख रखा है। नन्हें मुन्ने बच्चे ड्टाी उसी सामान के पास बैठे हैं। इस तरह के दृश्य को देखकर हर किसी व्यक्ति को सोचने को मजबूर कर रहा है। वहीं ओमनगर के लोग सरकारी की इस नीति को लेकर सरकार को कोसने में लगे हुए हैं।


तीन लोगों पर दर्ज हुई रिपोर्ट 


कोतवाली देहात एसआई ब्रजेश कुमार सिंह ने ओमनगर निवासी राजकिषोर, विनोद, राजपाल गुप्ता पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। जिसमें आरोप लगाया है कि इन तीनों आरोपी अपने साथ घातक अस्त्रों से लैस होकर ईंट पत्थर लेकर पुलिस अफसरों से भिड़ने की कोशिश की। यही नहीं लोगों को एक राय करके सड़क पर चारपाई डालकर जाम लगा दी थी और पुलिस प्रशासन और सरकार के प्रति गाली गलौच की है। पुलिस इस मामले में जांच करने में जुटी है।


तो फिर कैसे बने पहचान पत्र 

खात बात तो यह है कि जब यह लोग अवैध तरीके से अपने आशियाने बना रहे थे। तो उस समय इनको रोका क्यों नहीं गया अगर नहीं रोका गया तो फिर इन लोगों के राशन कार्ड, पहचान पत्र कैसे बन गए। यही नहीं ओमनगर के लोगों के बिजली कनेक्शन भी दे दिए गए। इन सब बातों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि उस वक्त इस अवैध निर्माण की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

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