कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

अधूरा प्रेम

पिण्टू कुमार पाल-


मैं गाता हूँ और वो सुनती है,
प्यार के ताने बाने बुनती है ।
काश होता ये काश होता ये,
सोच कर खुश वो होती है ।
हो गए हैं अब दोनों ही जुदा,
फिर भी वो सपने बुनती है ।
व्यस्त हैं दोनों अपने घर परिवार में,
पर कभी फ़ोन पर मिल जाती है ।
कुछ वो सुनाती है, कुछ मैं बताता हूँ,
अब बातें यूँ ही ख़त्म हो जाती हैं ।
हँसती है वह हंँसाती भी है,
मैं गाता हूँ 
और वो गुनगुनाती है ।।