वैदिक विज्ञान में पृथ्वी की महत्ता

द्यौर्मे पिता जनिता नाभिरत्र बन्धुर्मे माता पृथिवी महीयम्। (ऋग्वेद1:164/33)

और

माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः (अथर्ववेद 12:1:12)

ऊपर लिखे दोनों ही मंत्र पृथ्वी की वैदिक विज्ञान में महत्ता को निरूपित करते हैं । हमारे पास बहुत ही सशक्त सांस्कृतिक विरासत है किन्तु हम आधुनिक बनने के प्रयास में पश्चिम का अंधानुकरण कर रहे है जो हमें सिर्फ ढोंगी बना रहा हैं ।

भारतीय वैदिक विज्ञान सदैव से पृथ्वी की पूजा और संरक्षण पर बल देता रहा है । किन्तु हम भारत पश्चिम के तलवे चाटते हुए अपने ज्ञान व विज्ञान को भूल पृथ्वी दिवस मनाने का प्रपञ्च कर रहे हैं । भारतीयों के मानसिक दिवालियेपन का कारण देश का शैक्षिक वातावरण है और यह हम सबको एक और गुलामी की ओर ले जा रहा है ।

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