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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रो. सत्यकाम का व्याख्यान

अमृतलाल नागर का साहित्यिक अवदान

आज़र ख़ान-


             प्रो. सत्यकाम

हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अब्दुल अलीम की अध्यक्षता में आज विभाग में साहित्य समिति द्वारा ‘अमृतलाल नागर का साहित्यिक अवदान’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रो. अलीम की अध्यक्षता में विभाग में आयोजित यह दूसरा व्याख्यान था, इससे पहले शोध समिति के तत्वावधान में ‘हिंदी के विकास में उर्दू का योगदान’ विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. प्रणय कृष्ण ने व्याख्यान दिया था।
आज के व्याख्यान में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) में प्रो. सत्यकाम ने अमृतलाल नागर के साहित्य पर विस्तार से अपने विचार प्रकट किए। नागर जी ने साहित्य के माध्यम से समाज की समस्याओं को उजागर किया है। प्रो. सत्यकाम ने व्याख्यान के प्रारंभ में शोधार्थियों से रूबरू होने पर ख़ुशी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि ‘शोधार्थियों से बात करने से उन्हें ऊर्जा मिलती है’।

साहित्य समिति के प्रभारी प्रो. शंभुनाथ तिवारी जी ने विभागाध्यक्ष प्रो. अब्दुल अलीम द्वारा कराए जानेवाले कार्यक्रमों और विभाग के शोधार्थियों की सक्रियता के लिए उनकी सराहना की। वास्तव में विभाग की साहित्यिक गतिविधियों और उनमें शोधार्थियों, विद्यार्थियों की सक्रियता का पूरा का पूरा श्रेय अब्दुल अलीम सर को जाता है। तिवारी जी ने प्रो. सत्यकाम के बारे में बताया कि उन्होंने ‘समीक्षा’ पत्रिका के सह-संपादक के रूप में भी काम किया।

विभागाध्यक्ष प्रो. अलीम सर ने विभाग के शोधार्थियों और विद्यार्थियों की हौसला अफ़ज़ाई की। उन्होंने साहित्य व शोध समिति में शोधार्थियों की सक्रियता पर खुशी जताई। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं डॉ. राहिला रईस ने प्रो. सत्यकाम के व्याख्यान के संदर्भ कहा कि ‘अमृतलाल नागर जी के साहित्य को हम दलित विमर्श के क्षेत्र में देखते आए है, लेकिन स्त्री विमर्श भी उनके साहित्य में देखा जा सकता है’। अंत में स्नातकोत्तर के छात्र एवं साहित्य समिति के सचिव सुनील चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षक एवं सभी शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।