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ग्रामविकास-अधिकारी परीक्षा के प्रश्नपत्रों में लज्जाजनक अशुद्धियाँ!

प्रश्नपत्र बनानेवाले ‘प्रधानाध्यापक’, ‘लौकिक’, ‘द्विगु’, ‘कपड़ा’ आदिक नहीं लिख सके

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


२२ दिसम्बर-२३ दिसम्बर, २०१८ ई० को ‘ग्रामविकास-अधिकारी’ की परीक्षाएँ हुई थीं, जिनके सभी ‘सेट कोड’ और ‘परीक्षा पुस्तक सीरीज़’ में बड़ी संख्या में ऐसे शब्दों के लिखने में अशुद्धियाँ हुई हैं, जिन्हें देखकर पाँचवीं कक्षा का विद्यार्थी भी बता सकता है। अभी तक व्याकरण में तीन लिंगों– पुल्लिंग, स्त्रीलिंग तथा नपुंसकलिंग की ही व्यवस्था थी; किन्तु इस परीक्षा के प्रश्नपत्र बनानेवालों ने एक नया लिंग ‘स्रीलिंग’ की रचना कर ली है, जिसे ‘सेट कोड-एबी-२’ और ‘परीक्षा पुस्तिका सीरीज़– ए-एफ के ३४ और ३५ प्रश्नों में देखा जा सकता है। व्याकरण में ‘सेना’ का बहुवचन ‘सेना’ ही है; किन्तु प्रश्नपत्र बनानेवालों ने बहुवचन ‘सेनाएं’ किया है और क्रिया को एकवचन ‘बढी’ दिखाया है। यहाँ भी ‘बढ़ी’ होगा और बहुवचन में ‘बढ़ीं’। यह आठवाँ प्रश्न है, जिसके एक वाक्य में पाँच प्रकार की अशुद्धियाँ हैं। यहाँ ‘युद्ध क्षेत्र’ की जगह ‘युद्ध-क्षेत्र’ होगा, जो कि षष्ठी तत्पुरुष सामासिक चिह्न से अनुशासित होगा। इसके विकल्प भी अशुद्ध हैं। प्रश्न १० में ‘करुँ’ की जगह ‘करूँ’,’ ११ में ‘घोडा’ की जगह ‘घोड़ा’, १२ में ‘कपडा’ की जगह ‘कपड़ा’ होगा। इसके अतिरिक्त ‘बताइए’ के बाद पूर्णविराम चिह्न की जगह ‘विवरण-चिह्न’ (:–) होगा। १४ में विकल्प (डी) ‘लोकिक’ की जगह ‘लौकिक’, १५ के विकल्प (ए) में ‘दोनो’ की जगह ‘दोनों’ होगा। प्रश्न१५ देखें :– ‘उपसर्ग वह शब्दांश है’, के बाद ‘अल्पविराम-चिह्न (,) लगेगा, फिर ‘जो’ का प्रयोग होगा। इस प्रश्न के सभी विकल्पों में ‘जुडता’ के स्थान पर ‘जुड़ता’ होगा। २० में ‘कर्तव्य-अकर्तव्य’ की जगह ‘कर्त्तव्य-अकर्त्तव्य’ होगा। २५ में प्रयुक्त ‘प्रेषितयों’ का प्रयोग अशुद्ध है। २६ में विकल्प (बी) में ‘अर्द्व’ की जगह ‘अर्द्ध’ और (डी) में ‘कार्यालयी’ की जगह ‘कार्यालयीय’ होगा।


सीरीज़ एफ-ए, पुस्तिका पी-६ का पहला प्रश्न गद्यांश का है, जिसमें ‘भद्र जनों’, ‘श्रेष्ठ जनों’, ‘प्रिय जनों’ तथा ‘शिक्षित जनों’ का प्रयोग ग़लत है। ‘जनों’ के स्थान पर ‘जन’ का प्रयोग होगा; क्योंकि ‘जन’ स्वयं में बहुवचन का शब्द है। जन से पहले के शब्द जन से जुड़े रहेंगे। इसी में ‘प्रफुल्लित’ के स्थान पर ‘प्रफुल्ल’, ‘जगत’ के स्थान पर ‘जगत्’, प्रश्न १० में ‘यौग रूढ़’ के स्थान पर ‘योगरुढ़’ होगा। जिन प्रश्नों में ‘निम्न’ का प्रयोग है, उनमें ‘निम्नलिखित’ होगा। ४२ के सभी विकल्पों में पूर्ण वाक्य हैं; किन्तु ‘पूर्णविराम-चिह्न’ नहीं लगे हैं, जो कि अशुद्ध है।

परीक्षा पुस्तिका पी-२ और सीरीज़ बी ए को देखें :–
प्रश्न १ के विकल्प (सी) में ‘प्रधानाध्यपक’ की जगह ‘प्रधानाध्यापक’ होगा। प्रश्न २ में ‘जिनका उच्चारण स्वतन्त्रता से होता है’ की जगह ‘जिनका उच्चारण बिना किसी बाधा के होता है’ होगा। प्रश्न ३ के विकल्पों (ए), (बी) तथा (डी) में ‘कण्ठ्य’, ‘मूर्धन्य’ तथा ‘तालव्य’ की जगह ‘कण्ठ’, ‘मूर्धा’ तथा ‘तालू’ होगा। प्रश्न ४४ देखें :– सूरदास जी कौन से काल के संत कवि हैं? यहाँ ‘कौन से काल के’ के स्थान पर ‘किस काल के’ होगा। एक अन्य प्रश्न में ‘आपकी सब राह देख रहे हैं।’ की जगह ‘आपकी राह सभी देख रहे हैं।’ होगा। ‘रामचरित मानस’ की जगह ‘श्रीरामचरितमानस’ होगा। ‘घर पर’ की जगह ‘घर में’ होगा। प्रश्नपत्र बनानेवालों ने इस पूरी परीक्षा के सभी विषयों के प्रश्नपत्रों में सैकड़ों अशुद्ध शब्दों और विरामचिह्नों का प्रयोग किया है। ‘द्विगु’, ‘द्वन्द्व’, ‘तत्पुरुष’, कड़ी’, ‘दीं’ आदिक सैकड़ों अशुद्ध शब्दों के प्रयोग इस परीक्षा को आयोजित करानेवाले संस्थान के अधिकारियों को अपराध के कठघरे में खड़ा करते हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २७ दिसम्बर, २०१८ ईसवी)


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