न मिला बटन और सुई-धागा तो बच्चे ने कमीज में ताला जड़ लिया

अभी समाज मे हम जितना सोच सकते, है उससे भी ज्यादा गरीबी और असमानता है

आशीष सागर (प्रतिष्ठित समाजसेवी)-


"खबर का लुत्फ उठाओ इस बच्चे की बदनसीबी के साथ"

 

बाँदा ( कमासिन- बबेरू क्षेत्र ) – यह उच्चतर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 6 का छात्र है. नाम है शत्रोहन निषाद, इस बच्चे की स्कूल की ड्रेस आज गन्दी थी तो यह ड्रेस पहनकर स्कूल चला आया !…अब तस्वीर को ध्यान से देखिएगा ! शत्रोहन जो कमीज पहने है उसकी बटनें टूटी है. मास्टर जी डांटें नहीं इसलिए उसने कमीज में जुगाड़ से अपनी गरीबी के चीथड़े को छुपाने की नाकामयाब कोशिश की. लेकिन मास्टर जी की निगाह कमीज पर पड़ी तो वे भी भौचक्के रह गए ! नाम न लिखने की शर्त पर स्कूल के मास्टर जी कहते है कि ‘ अभी समाज मे हम जितना सोच सकते है उससे भी ज्यादा गरीबी और असमानता है। ‘ बच्चा कमीज में बटनों की जगह एक ताला लगाये है और एक जगह तार बांधे है ! शायद उसको लगा कि अब कभी बटन टाकने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी ! वो चाहता तो आज स्कूल न आता पर उसकी पढने की ललक उसको इस हलात में ले आई ! आप समझ सकते है कि मोगरिया पुरवा पोस्ट वीरा का ये छठवीं का छात्र घर से कितना गरीब होगा ! इधर सवाल ये भी कर सकते है कि बच्चे ने जब ताले का जुगाड़ किया तो बटन का भी कर सकता था तब ये भी कहना लाजमी है कि ताला तो आजकल भिखारी के भी घर में मिलता है सबको अपने सामान की चिंता है वो कितना भी तंग हो !….बचपन निश्छल है उसने अपने से चतुराई नहीं की ! गौरतलब अगर स्कूल में एमडीएम न मिले तो बुन्देलखण्ड के बहुत से गरीब परिवार गाँव में ऐसे है जहाँ बच्चो को शायद ही कभी अच्छा भोजन मिलता हो ! त्यौहार में मिठाई, लाई-खील की तो बात भूल जाइए ! होली में इनके लिए पिचकारी वैसे ही है जैसे आपके बच्चो के लिए तारे जमीन पर ! यह तस्वीर मास्टर जी ने अपने मोबाइल से ही ली है अब स्कूल का नाम नहीं बतलायेंगे मास्टर जी की नौकरी खतरे में आएगी !…वैसे जो शिक्षा अधिकारी इसमें अध्यापक को दोषी मानता है वो बेगैरत है क्योकिं बच्चा खुद से कमीज पहनकर आया अध्यापक ने उससे नहीं कहा ! अध्यापक ने तो बस गरीबी का सच दिखलाया है !….आप बस इस बदलते यूपी प्रदेश / बुन्देलखण्ड की गरीबी और डिजीटल इंडिया का मजा लीजिये वो भी इस बावत कहे से सुबह भी एक किसान की मौत का पोस्ट किये थे वाल में पड़ा है….उसमें सबको सांप सूंघ गया है…घबराइये नहीं इसके लिए कोई मदद नहीं मांगने जा रहे है….! तस्वीर का लुफ्त उठाओ इसकी बदनसीबी के साथ ! बच्चे की मंद मुस्कान देखो उसको अपने किये का कोफ़्त नहीं है वो जानता है देश बदल रहा है….सबका काम भी बोल रहा है !

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