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इंडिया गेट : ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल

इंडिया गेट (ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल) राजपथ (किंग्सवे) के पूर्वी छोर पर स्थित है। इसे प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियन ने डिजाइन किया है। यह फ्रांस, रोम में बने स्मारकों की तर्ज पर बना हुआ है। इसका शिलान्यास ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में किया था। लाल और बलुआ पत्थरों से बने इस 42 मीटर ऊंची षटकोणीय स्मारक का 1931 में लार्ड इरविन द्वारा उद्घाटन किया गया। जब यह भव्य स्मारक बना तो इसके सामने जॉर्ज पंचम की मूर्ति स्थापित थी, जिसे आज़ादी के बाद कोरोनेशन पार्क में स्थापित कर दिया गया। पिछले वर्ष तक वहां छतरी भर थी ।

इंडिया गेट, वर्ष 1914 से 1921 के मध्य प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध के दौरान अंग्रेजी सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गए 90,000 सैनिकों की याद में बनाया गया है। इंडिया गेट की दीवारों पर कुल 13,300 सैनिकों के नाम दर्ज हैं।

कालांतर में, 1971 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में , इंडिया गेट पर काले पत्थरों के बेस पर बनी हुई अमर जवान ज्योति स्थापित की गई थी। जो तब से लगातार प्रज्ज्वलित हो रही है ।

गणतंत्र दिवस को प्रधानमंत्री सबसे पहले अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उसके बाद ही राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक की 2.3 किलोमीटर लंबी भव्य और आकर्षक गणतंत्र दिवस परेड शुरू होती है।

पिछले वर्ष सरकार ने अमर जवान ज्योति को इंडिया गेट के पास ही नए बने वॉर मेमोरियल (समर संग्रहालय ) की ज्योति के साथ मिला दिया और इंडिया गेट के सामने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य मूर्ति स्थापित की ।

इस निर्णय को मैं तीन कारणों से सही मानता हूं –

  1. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए सैनिक, भारत के लिए नहीं बल्कि अंग्रेजों के लिए लड़ रहे थे। अतः उन्हें “भारत के शहीद” कहना कुछ खटकता है।
  2. अमर जवान ज्योति सिर्फ 1971 युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में है । जबकि वार मेमोरियल सभी शहीद सैनिकों के सम्मान में बनाया गया है।
  3. स्वतंत्रता के बाद गांधी और नेहरू के तेज़ शोर में हाशिये पर डाल दिये गए, भारत की आजादी के सबसे बड़े हीरो नेताजी की मूर्ति लगाने से, उनका खोया हुआ कुछ सम्मान तो वापस आयेगा।

—-✍🏻 आशा विनय सिंह बैस