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पौराणिक घटनाएँ और विज्ञान

कुमार सतीश जी की फेसबुक-वॉल से

खगोलीय विज्ञान में आइंस्टाइन एक बड़ा नाम है.
और, आइंस्टाइन के अनुसार इस ब्रह्मांड में सबसे तेज गति प्रकाश की होती है जो कि लगभग 3 लाख (2,99,972) किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है.

साथ ही आइंस्टाइन का ये भी कहना था कि… प्रकाश की गति को हासिल कर पाना असंभव है..
क्योंकि, प्रकाश की गति से सिर्फ प्रकाश ही चल सकती है.

आइंस्टाइन ने इस संबंध में आगे बताते हुए कहा कि अगर किसी तरह कोई प्रकाश की इस गति को हासिल कर लेगा तो उसके लिए समय रुक जाएगी.

आइंस्टाइन की प्रकाश की गति वाली ये थ्योरी भौतिकी एवं खगोल विज्ञान में एक स्थापित सत्य है और इस थ्योरी को आजतक गलत साबित नहीं किया जा सका है…!

ये तो हो गई खगोल विज्ञान एवं भौतिकी के नियम और स्थापित सत्य.

अब चीजों को ध्यान से समझने की जरूरत है…!

हमारे वेदों से लेकर पुराणों और रामायण तक में वर्णित सप्तऋषि मालूम है कि क्या है ???

सप्तऋषि और कुछ नहीं बल्कि…. “ओरायन कॉन्स्टलेशन” हैं… जिसमें बेहद चमकदार 7 तारे हैं.

आजतक के सबसे ताकतवर दूरबीन हबल के अनुसार इस “ओरायन कॉन्स्टलेशन” की पृथ्वी से दूरी 1500 प्रकाशवर्ष है.

इसका मतलब हुआ कि… अगर किसी तरह प्रकाश की गति हासिल कर भी ली जाए (जो कि असंभव है) तो भी इस कॉन्स्टलेशन तक पहुंचने में 1500 साल लग जाएंगे.

और, फिर वहाँ से लौटने में 1500 साल लगने हैं.

अब, इंसान की औसत आयु मैक्सिमम 100 साल ही पकड़ लो.
तो, सिर्फ वहाँ तक पहुंचने में ही 15 जन्म लग जाने हैं.

जबकि, हमारे वेद और पुराण की कथाओं में ये स्पष्ट रूप से वर्णन है कि…
दक्षप्रजापति की सात पुत्रियों की शादी सप्तऋषि से हुई थी…!

इसी तरह… अन्य कथाओं में भी सप्तऋषि का जिक्र बार बार आया है.

तो, ये मान लेना कि… सप्तऋषि अर्थात ओरायन कॉन्स्टलेशन का जिक्र बार बार सिर्फ कथाओं को रोचक बनाने के लिए ही कर दिया होगा… कुछ हजम नहीं होती है.

लेकिन, साथ ही ये भी सही है कि… किसी तारे से इंसान का विवाह तो हो नहीं सकता है.

पुराणों में उल्लेखित इस घटना को हम वैज्ञानिक नजरिये से देखें तो ये समझ आता है कि…. दक्ष प्रजापति की पुत्रियों का विवाह ओरायन कॉन्स्टलेशन के राजाओं से हुआ था.

और, इस घटना को सप्तऋषि से विवाह इसीलिए कहा गया … जैसे कि…

आज किसी अन्य देश से मैच में जीतने पर कहा जाता है कि… भारत जीता.

हमारे राष्ट्राध्यक्ष बयान को … “भारत ने कहा”

“भारत UNO में गया”… टाइप से कहा जाता है…!

उसी तरह… सप्तऋषि से विवाह की बात को ओरायन कॉन्स्टलेशन के राजाओं के संदर्भ में देखे जाने की जरूरत है…
न कि अपनी मूर्खता का परिचय देते हुए … ग्रह अथवा तारे से ही विवाह साबित करने पर अड़ जाएँ.

लेकिन, इन सबके अलावा भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न ये है कि विवाह और आना जाना भी समझ आता है लेकिन 1500 प्रकाशवर्ष की दूरी आखिर तय कैसे हुआ ???

तो, इसका एक ही जबाब है कि… या तो हम विज्ञान के उस लेवल तक पहुंच नहीं पाए हैं कि इस बात को समझ पाएँ.

या फिर… हमारे पूर्वजों को वार्म होल्स तक की जानकारी थी जिसके माध्यम से वे आया जाया करते थे.

बहुत ही सामान्य सी बात है कि…. आज से महज 50 साल पहले भला कोई इस बात की कल्पना तक कैसे कर पाता कि…. हाथ में एक बिस्किट के आकार का सामान होगा जिसमें कोई तार-वार नहीं होगा लेकिन जिससे उससे लोग बात भी कर पाएंगे..
एक दूसरे का चेहरा भी देख पाएंगे..

और, फालतू की बकसोदी कर अपने धर्म पर उंगली भी उठा पाएंगे.

उसी प्रकार… फैक्स मशीन, ईमेल, RTGS, बैंक ATM, PAYTM जैसे हजारों उदाहरण हैं… 100 साल पहले तक जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी.

इसीलिए, हर चीज को आज के संदर्भ से एवं अपनी अल्प जानकारी के पैमाने से देखना और उसे सही अथवा गलत घोषित कर देना उपर्युक्त नहीं है.

अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि… जब हमारे पूर्वजों के पास हजारों प्रकाशवर्ष दूर तक की यात्रा की व्यवस्था थी..
समुद्र में पुल बनाने की व्यवस्था थी.
क्रोमोजोम्स के विभाजन की पद्धति समझ कर गोत्र सिस्टम बनाने लायक टैलेंट था..
आज भी हमारे पांचांग में पूरे साल होने वाले चंद्र एवं सूर्य ग्रहण का सटीक विवरण मौजूद रहता है.

तो, फिर… हमारे किस धार्मिक ग्रंथ में कौन सी अतिश्योक्ति कर दी गई है जो हो पाना असंभव है.
अथवा, जिसकी वैज्ञानिक व्याख्या संभव नहीं है ???

फिर भी… मेरा यही कहना है कि आस्था को आस्था ही रहने दिया जाए..

हाँ… ये वैज्ञानिक दृष्टिकोण हमारे अपने बच्चों की जिज्ञासा शांत करने के लिए जरूर उपयोगी है.

जय महाकाल…!!!