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डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित का उमा मिश्रा प्रीति द्वारा साक्षात्कार

एक मुलाकात

उमा मिश्रा प्रीति:- सबसे पहले तो साक्षात्कार संगम पेज पर आपका स्वागत। आप अपना परिचय दीजिए।

डॉ.राजेश पुरोहित:- मैं राजेश कुमार शर्मा पुरोहित भवानीमंडी जिला झालावाड राजस्थान से हूँ। साहित्य संगम संस्थान का राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी का मेरे पास दायित्व है।

उमा मिश्रा प्रीति:-आपको साहित्य जगत में आने की प्रेरणा कहाँ से मिली ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- मुझे साहित्य जगत में आने की प्रेरणा मेरे पिताजी स्वर्गीय श्री शिवनारायण शर्मा जी से मिली।वे रामायण गीता पढ़ा करते थे। मैं भी उनके साथ- साथ धार्मिक साहित्य पढ़ने लगा।धीरे धीरे समाचार पत्रों पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने में रुचि लेने लगा। मेरे भीतर से प्रेरणा हुई और लिखना शुरू किया।माँ शारदे की कृपा हुई मेरे अध्यात्म गुरु परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज का आशीर्वाद मेरे साथ है।

उमा मिश्रा प्रीति:- साहित्य संगम संस्थान से जुड़कर आपको कैसा लगा ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- साहित्य संगम संस्थान से जुड़कर साहित्य जगत में मेरा परिचय देश के कई राज्यों के साहित्यकारों कवि कवयित्रियों से हुआ। साहित्य लेखन में भी अधिक सक्रिय हुआ। मुझे संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय राजवीर सिंह मन्त्र साहब का पूरा मार्गदर्शन सहयोग मिलता है। उनसे प्रेरणा मिलती है। मन्त्र साहब ने मुझे संस्थान का राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मनोनीत किया जिससे मुझे अब तक 19 प्रान्तों के साहित्य मनीषियों से रूबरू होने का अवसर मिला संस्थान की बहुत खूबियाँ हैं। प्रमुख बात है यह संस्थान नवोदित स्थापित सभी रचनाकारों को मंच देता है । सम्मानित करता है। जिस रचनाकार की जिस कार्य मे रुचि है । संस्थान उनकी रुचि देखकर आगे बढ़ने का अवसर देता है । संस्थान से जुड़कर मेरी ख्याति सारे देश के साथ ही विदेशों तक फैली है।

उमा मिश्रा प्रीति:- क्या लेखन एक शिल्प कला है ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- जी हाँ! लेखन भी एक शिल्प कला है। जब हम कोई छंद लिखते हैं तो शिल्प का ध्यान रखकर ही लिखते हैं उसका भी एक विधान होता है कथावस्तु चरित्र चित्रण संवाद देश काल भाषा शैली उद्देश्य आदि बातों को ध्यान में रखकर ही कोई लेखक लेखन कार्य करता है अतः कहा जा सकता है कि लेखन भी एक शिल्प कला है

उमा मिश्रा प्रीति:- कलमकार, नवांकुर कविताएं कैसे लिखें और उन्हें कविताएं कैसे पढ़ना चाहिए ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- कविता लिखने से पूर्व हम यह समझें कि कविता क्या है ? कविता मानव जीवन का सार है। जो मनुष्य को स्वार्थ सम्बन्धों के संकुचित घेरे से ऊपर उठाती है और शेष सृष्टि से रागात्मक सम्बन्ध जोड़ने में सहायक होती है।

अब हम कविता कैसे लिखें पर बात करते हैं। कविता लिखने का मतलब अपने अंदर झाँकना चारो ओर की दुनिया को देखना।कविता लिखने के बारे में सोचना।लिखने का अभ्यास करना। अपने माहौल से या अपने करीबियों से प्रेरणा पाएं।एक खास थीम या विचार चुनें। नये कवि कवयित्री को कविताओं के उदाहरण पढ़ना चाहिए अलंकारों का प्रयोग कविता में होना चाहिए जैसे अनुप्रास अलंकार का एक उदाहरण है:-
चारु चन्द्र की चंचल किरणें
खेल रही थी जल थल में

एक ही तरह के वर्ण को इस अलंकार में दोहराया जाता है।
नये कलमकार को रूढ़िवादी धारणाओं के प्रयोग से बचना चाहिए। कविता को प्रस्तुत करते समय जोर जोर से पढ़ें। दूसरों से प्रतिक्रिया मांगें। अपनी कविता को दोहराएं तभी काव्य गोष्ठी कवि सम्मेलन में आपकी रचना प्रभावशाली होगी।
नये कवि कवयित्रियों को शब्द सम्पदा बढ़ाने हेतु विशाल शब्दकोश बढ़ाने हेतु स्वाध्याय करना चाहिए शब्दकोश विशाल होने पर ही सटीक अभव्यक्ति होगी। बिना शब्द कविता में भावना का अस्तित्व ही नहीं होता है।

साहित्य एक सृजनात्मक अभव्यक्ति है।ये भाव एवम कल्पना पर आधारित होती है।कविता के बाह्य आकार को अगर कोई सुन्दर बनाता है तो वो छंद है । छंद क्या है? छंद अक्षरों की संख्या एवम क्रम मात्रा गणना यति गति के सम्बंध विशिष्ट नियमों से नियोजित पद्य रचना छंद कहलाती है। एक नए कमलाकर को कविता का आंतरिक स्वरूप कविता के भाव प्रयोजन कल्पना शक्ति उद्देश्य आदि का ध्यान रखना होता है। कविता में गीत कविता कथा कविता वर्णनात्मक कविता आदि होती है।

उमा मिश्रा प्रीति:- पुरोहित जी आप कथाकार भी हैं कहानियाँ लिखते हैं । आपकी अभिलाषा, आशीर्वाद कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिनमे एक से बढ़कर एक अच्छी कहानियां हैं । तो आप यह बताइए कि नये कलमकार कहानी कैसे लिखें ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- एक अच्छी कहानी लिखने के लिए आपको प्रेरणा की तलाश करनी होती है।विषयवस्तु तैयार करनी होगी। दुनिया की तरफ अपने आसपास के माहौल पर ध्यान दें। अपने अनुभवों का इस्तेमाल करें। आपके द्वारा सुनी हुई किसी कहानी पर गौर करें।कहानी को घटनाक्रम के अनुसार लिखें। लेखन अभ्यास का विस्तार करें। कहानी के तत्व कथावस्तु पात्र का चरित्र चित्रण वातावरण संवाद भाषा शैली सरल स्पष्ट विषय अनुरूप ,देश काल परिस्थिति के अनुरूप उद्देश्य होना चाहिए। कई कहानीकार हुए जिनमें मुंशी प्रेमचंद प्रसाद निराला अज्ञेय निराला आदि की कृतियाँ पढ़ना चाहिए। मेरे पसंदीदा कथाकार मुंशी प्रेमचंद जी है जिनकी कहानियां ईदगाह पंच परमेश्वर पूस की रात शतरंज के खिलाड़ी अच्छी कहानियाँ हैं।

उमा मिश्रा प्रीति:- नये साहित्यकार को कैसा साहित्य लिखना चाहिए ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- नये साहित्यकार को ऐसा साहित्य लिखना चाहिए जो समाज को कुरीतियों रूढ़ियों को दूर कर सके।सामाजिक समस्याओं का निदान कर सके। देश सेवा से जुड़े विषयों पर लिखें।

उमा मिश्रा प्रीति:- नये कलमकारों को आप क्या सन्देश देना चाहते हैं ?

डॉ. राजेश पुरोहित:- नये कलमकारों को यह कहना चाहूँगा कि आप छंदबद्ध रचना लिखना सीखें। सामाजिक समस्याओं पर आधारित विषयों पर अपनी पैनी कलम चलाएं। सम्मानों की दौड़ में न लगें। साहित्य लेखन एक साधना हैं। जो जितनी साधना करेगा उसकी रचना उतनी ही परिष्कृत होगी।

उमा मिश्रा प्रीति
संचालिका
साक्षात्कार संगम फेसबुक पेज
साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली

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