युवा कवि अशोक दीप से साहित्यकार राजेश पुरोहित की ख़ास मुलाक़ात

“ओ मेरी सांसों के दीप” हिन्दी काव्य कृति के रचनाकार, साहित्य सारथी गौरव सम्मान व अमीर खुसरो सम्मान से सम्मानित युवा कवि एवं साहित्यकार अशोक दीप से देश के ख्यातिनाम वरिष्ठ कवि डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर ख़ास मुलाक़ात की। जिसके मुख्य अंश प्रस्तुत हैं।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ : साहित्य के क्षेत्र में आपकी पहली रचना कब प्रकाशित हुई ?

अशोक दीप : साहित्यिक क्षेत्र में प्रथम रचना “नौका पार लगाए कौन” 2007 में राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की मासिक पत्रिका ‘मधुमती’ में प्रकाशित हुई ।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित : साहित्य लेखन की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
अशोक दीप : दोस्त एवं अध्ययन के दौरान एक निदेशक महोदय से ।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’: आपकी शिक्षा कहाँ से हुई। परिवार की ओर से आपको किनका सहयोग मिला ?

अशोक दीप : प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गाँव में ही हुई, माध्यमिक बर्डोद में, स्नातक राजकीय महाविद्यालय बहरोड़ अलवर से एवं स्नातकोत्तर (हिंदी) लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय कोटपूतली जयपुर से । परिवार की साहित्यिक पृष्ठभूमि न होने के कारण सहयोग की बात बेमानी सी है । हाँ दोस्तों के सहयोग व स्नेह को कभी नकार नहीं सकता ।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’: अभी तक आपकी कितनी रचनाएँ छपी हैं ?

अशोक दीप : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सैकड़ों रचनाएँ प्रकाशित हो चुकीं हैं । इनके साथ ही एक काव्य संग्रह भी
1 ओ मेरी साँसों के दीप (हिन्दी काव्य) प्रकाशित
2 क्यों आँसू लिखते रहते हो (हिन्दी काव्य) प्रकाशनाधीन
3 नदी एक जो रेतां रलगी (राजस्थानी काव्य) प्रकाशनाधीन

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’: आप साहित्य संगम संस्थान दिल्ली से कब जुड़े ?
अशोक दीप : साहित्य संगम संस्थान दिल्ली से जुड़ना एक सुखद अनुभूति है । संस्थान से जुड़े अभी अधिक समय नहीं हुआ है इसकी गणना फिलहाल महीनों में की जा सकती है। आने वाले समय में यह समयावधि वर्षों में परिवर्ती हो जाएगी ।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’: आप और किन किन साहित्यिक संस्थाओं से सम्बंध रखते हो?
अशोक दीप : मूलतः राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति साहित्य अकादमी बीकानेर, राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर से ही सम्बद्धता रही अब साहित्य संगम संस्थान, मुक्तक मञ्जरी, उड़ान, सृजन समीक्षा, साहित्य गंगा इत्यादि से ।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’: अभी तक आपको कहाँ कहाँ से समनानित किया जा चुका है?
अशोक दीप : विविध मंचों से श्रेठ रचनाकार सम्मान। साहित्य संगम संस्थान से “साहित्य सारथी गौरव सम्मान” अमीर खुसरो सम्मान, महेंद्र कपूर सम्मान ।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ : ‘उपनाम संस्कार’ का आप इंदौर में समारोह कर रहे हैं इसकी क्या तैयारियां की है। कितने रचनाकारों को उपनाम दिया जाएगा?

अशोक दीप : इसके सूत्रधार आदरणीय राजवीर सिंह जी मंत्र हैं । इसके लिए संस्थान ने भव्य तैयारी कर रखी है । दिनाँक 16-02-2020 को यह समारोह वैदिक रीति रिवाज से इंदौर में संपन्न होगा। नामकरण आचार्य भानुप्रताप वेदालंकार जी द्वारा किया जाएगा । इस समारोह में 151 रचनाकारों को उपनाम दिया जाएगा । शाम को काव्य सम्मेलन भी रखा गया है।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ : जीवन की वह घटना जो आप भूल नहीं सकते उसे बताइए?

अशोक दीप : यह 2012 की घटना है। मैं एक सवारी जीप में बैठकर ड्यूटी जा रहा था । बीच रास्ते में एक बुजुर्ग ने हाथ इशारे से जीप रुकवाई भीड़ ज्यादा थी बैठे तो कहाँ ? मैंने जैसे तैसे अपने पास बिठाया बातें शुरू हुई । बातों में दर्द के अलावा कुछ नहीं था । जब कंडक्टर ने किराया मांगा तो उन्होंने अपनी फटी पुरानी कमीज की जेब से एक पालीथिन निकाली उसकी तह खोलने लगे मैंने देखा उसमें मात्र 70-80 रु थे । मैंने कहा बाबा आप रहने दीजिए मैं दे दूँगा । मैंने कंडक्टर से कहा कि इनका किराया मैं देदूँगा । इतना करते ही उन्होंने आशीषों की झड़ी लगा दी सिर पर बड़े प्यार से हाथ फेरा लाख कोशिश करने के बावजूद मेरी आँखों से आँसू निकल पड़े। जीवन की इस घटना को कभी भूल नहीं सकता

डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ : आप नवोदित लेखकों को क्या संदेश देना चाहते हैं।
अशोक दीप : खूब पढ़िए, खूब लिखिए । जिंदगी किताब जैसी है ।

साक्षात्कारकर्ता
डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
कवि, साहित्यकार
भवानीमंडी, जिला झालावाड़
राजस्थान

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