मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

लोक संसद – सिद्धान्त के प्रश्न में छात्रसंघ, निकाय तथा विधानसभा-लोकसभा के उपचुनावों में भा०ज०पा० की पराजय ‘विपक्ष’ के ‘अच्छे दिन’ आने का संकेत कर रही है क्या?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


छात्रसंघ, निकाय तथा विधानसभा-लोकसभा के उपचुनावों में भा०ज०पा० की पराजय ‘विपक्ष’ के ‘अच्छे दिन’ आने का संकेत कर रही है क्या?


विजय शंकर करहिया ऐसे निष्कर्ष निकलना जल्दबाजी होगी

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- यहाँ आपको ‘निष्कर्ष’ कैसे दिख गया?

विजय शंकर करहिया- विपक्ष के अच्छे दिन आने की बात करना एक तरह से निष्कर्ष निकलना ही है

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- करहिया जी! इसे ‘निष्कर्ष’ नहीं, ‘सम्भावना’ कहते हैं।

कुसुम शुक्ला- अभी सारा ध्यान गुजरात की तरफ है।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- गुजरात अभी नेपथ्य में है।

रविन्द्र पाण्डे- कौन विपक्ष? माया शून्य, सोनिया मुलायम कुनबा, यह तो उत्तर प्रदेश की स्थिति है। बंगाल में ममता का कोई भरोसा नहीं सब बिखरे है। जब तक विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर एक नहीं होगा उसके अच्छे दिन नहीं आ सकते।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- इसीलिए प्रश्नात्मक है।

एसपीएस राजन- पार्टी के अँदर और बाहर बड़ी तादात में ऐसे काबिल लोग हैं जो मानते हैं कि भारत जैसे विशाल देश को जेटली,ईरानी,शाह यहाँ तक की सा ब के भरोसे नही छोड़ा जा सकता ।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- अब देखना है, देश का मतदाता क्या निर्णय करता है?

एसपीएस राजन- डॉ. साहब, अपने वादों को दरकिनार करने वाले पद के साथ नाइंसाफी करने वाले को भारतीय मतदाता दुबारा पँच/पार्षद नही चुनता यहाँ तो कथनी और करनी में बहुत लोचा दिखाई सुनाई दे रहा सो उम्मीद है ।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक सीख देनी आवश्यक है ताकि आनेवाले सत्ताधारी सजग और सावधान रहें।

तारक नाथ त्रिपाठी- शायद यह अभी कहना जल्द बाजी तो नही होगा ?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- कहा नहीं गया है, बल्कि प्रश्नात्मक सम्भावना व्यक्त की गयी है।

प्रदीप भटनागर- सुबह से लेकर देर रात तक बमबाजी, एक राजनेता और दो छात्रों की हत्या में अगर आपको अच्छे दिन नजर आ रहे हैं तो आपको मुबारक हो ऐसे अच्छे दिन।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- नज़र नहीं आ रहे हैं, बल्कि प्रश्नात्मक सम्भावना व्यक्त की गयी है। हत्याएँ हुई हैं तो सुरक्षातन्त्र प्रश्नों के घेरे में है।

पुरुषोत्तम फौजदार- एक संकेत है कि भाजपा से मतदात नाराजहै । विपक्ष बिखरा हुआ है ! भाजपा मे से भीबिपक्ष निकल सकता है। ऐसा मेरा मानना है क्योकि यशवन्त सिन्हा ने जिस प्रकार हमला बोला उससे मुझे लगता कि भाजपा मे सब कुछ ठीक नही है । जनता पार्टी की तरह यह बिखर सकती है। भाजपा के कई बड़े नेताओ की चुप्पी समय आने पर टूट सकती है! हम निष्कर्ष नही निकाल रहे शंका जाहिर कर रहे है।

जगन्नाथ शुक्ल- गुरुदेव! अभी विपक्षशून्यता है कोई उभरता नहीं दिख रहा है, विभिन्न राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव के बाद कुछ बेहतर तस्वीर दिख सकती है ।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- सहमत हूँ। यहाँ तो प्रश्नात्मक सम्भावना व्यक्त की गयी है।

संगामल भंवर- तीन साल बीत गये कब आयेगें अच्छे दिन इसलिये यह मान लिया जाय कि विपक्ष के अच्छे दिन आने के आसार हैं |

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- सम्भावना बन रही है।