उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री को ‘समाजवाद’ से ‘एलर्जी’ है

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

खेद है, उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री को यही ज्ञान नहीं, ‘समाजवाद’ क्या है, अन्यथा वे कल लखनऊ में नहीं कहते, “देश को समाजवाद नहीं, रामराज चाहिए।”

भारतीय समाज में घृणा का बीज बोनेवाला व्यक्ति यदि ‘रामराज’ की बात करता है तो मन अट्टहास कर उठता है। जिस राज्य में प्रतिदिन अनेक बच्चियों-किशोरियों-युवतियों के साथ दुराचार कर उन्हें आततायियों-द्वारा मार डाला जा रहा हो और उस राज्य का मुखिया ‘किंकर्त्तव्यविमूढ़-सा बना दिख रहा हो, वहाँ न तो समाजवाद आयेगा और न ही रामराज।

रामराज की बात करने वाले मुख्यमन्त्री के राज्य के विधायक, सांसद, मन्त्री आदिक नारी-अपहरण, नारी-व्यभिचार, नारी-दुराचार तथा नारी-हत्या के अभियुक्त सिद्ध हो चुके हैं, जिनमें से कुछ भागते फिर रहे हैं; कुछ ने ज़मानत करा ली है तो कुछ जेल में कर्म का परिणाम भोग रहे हैं; किन्तु इस मुख्यमन्त्री ने उन अपराधियों की निन्दा तक नहीं की। इससे अनुमान लग जाता है कि ‘न्यू इण्डिया का रामराज’ कितना बीभत्स होगा।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० फ़रवरी, २०२० ईसवी)

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