कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला


देश के प्रसिद्ध कोचिंग-संस्थान ‘दृष्टि’ की ओर से आयोजित एक छद्म साक्षात् परीक्षा (साक्षात्कार परीक्षा’ अशुद्ध है।) का मूल्यांकन

आई० ए० एस०-सेवा के लिए सुनीता नामक अभ्यर्थिनी छद्म ‘साक्षात् परीक्षा’ के लिए बुलायी गयी थी। परीक्षा की दृष्टि से अभ्यर्थिनी (जयपुर-निवासिनी) अभी अपरिपक्व है; अभिव्यक्ति-स्तर पर आत्मविश्वास का अभाव है; तथ्य और तर्क में साम्य नहीं है। अभिव्यक्ति का स्तर संतुलित नहीं है तथा भाषिक दारिद्र्य स्पष्ट लक्षित हो रहा है। आई०-ए० एस०-परीक्षा की दृष्टि से अभ्यर्थिनी का सामाजिक और ‘अति सामान्य ज्ञान’ अति समान्य है।

प्रथम दृष्ट्या सभी प्राश्निकों के प्रश्न-प्रतिप्रश्न और प्रश्न करने की शैली लुभावनी लगती हैं; परन्तु भाषास्तर पर विचार करने पर अनेक स्तर पर अतीव ‘स्खलन’ लक्षित होता है।

अभ्यर्थिनी को सफल बनने के लिए अभी बहुत परिश्रम करना होगा; साथ ही प्राश्निकों/परीक्षकों को अपना उच्चारणदोष दूर करना होगा और अनुपयुक्त शब्दप्रयोग से बचना होगा।

अब एक सूक्ष्म परीक्षण ‘प्राश्निकों’/’परीक्षकों’ के भाषाज्ञान का–

‘साक्षात्कार-समिति’ के लिए ध्यातव्य तथ्य :–
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संशोधित–
देखिए! कैसे किया जाता है, ‘भारतीय प्रशासनिक सेवाओं’ के लिए साक्षात्कार?

आग्रह– आप लोग अपने हिन्दी-स्तर को गिराइए नहीं।

प्रश्न– ‘एक IAS’ का प्रयोग शुद्ध है?
उत्तर– IAS ऐसे लिखा जाता है– I. A. S.।
प्रश्न– I. A. S. के ठीक पहले ‘एक’ शब्द का प्रयोग किसलिए किया गया है?
प्रश्न– यहाँ प्रयुक्त ‘हे’ का अर्थ क्या है?
कथित ‘इंटरव्यू’ होता है नहीं, ‘किया’ जाता है। ‘होने’ और ‘करने’ में अन्तर होता है।
शीर्ष पर दिख रहा ‘कैसे होता है आइपीएस का इंटरव्यू’ शुद्ध है?
आप सभी प्राश्निकों को ‘श’ और ‘ष’, ‘फ’ और ‘फ़’ के उच्चारण में अन्तर समझते हुए, उच्चारण-अभ्यास करना होगा; जैसे– विशय नहीं, ‘विषय’ है।
प्रश्न– महिला से प्रश्न करते समय “आप इसे कैसे ‘देखते’ हैं?” और अन्य ‘पुंल्लिंग’ क्रिया के प्रयोग शुद्ध हैं?
सभी प्राश्निक ‘अछा’ के स्थान पर ‘अच्छा’ का उच्चारण करें।
अन्य अशुद्धियाँ भी हैं।

◆ पहले क्रम के प्राश्निक ने ‘चहिए’, ‘फ़ैलाती’, ‘मारना-पिटना’, ‘ठिक है’, ‘लेकिन फ़िर भी’ ‘डिमोक्रेसी’, ‘चेतना पर’ आदिक कई अशुद्ध शब्दों के व्यवहार किये हैं।

◆ दूसरे क्रम के प्राश्निक ने अपने प्रश्नात्मक वाक्य में ”आपने ‘मध्यकालीन इतिहास में’ ज़्यादा अध्ययन किया है” का प्रयोग किया है। यह वाक्यविन्यास शुद्ध है? इसी प्राश्निक ने हिन्दी-शब्दप्रयोग के अन्तर्गत ‘श’ के स्थान पर ‘स’ का अनेक बार उच्चारण किये हैं, क्यों?

◆ तीसरे क्रम का प्राश्निक अंशत: ‘अअ’ कर प्रश्न करता दिख रहा है। उसने ‘महत्त्व’ का ‘मेहत्व’ और ‘कुछ’ के स्थान पर ‘कुछ एक दो’ के प्रयोग किये हैं। वही परीक्षक महिला से प्रश्न करते समय ‘आयेंगे, जायेंगे, बतायेंगे, करेंगे, समझते हैं’ आदिक क्रियात्मक शब्दों का ‘पुंल्लिंग’-रूप में प्रयोग कर रहा है। वह भूल चुका है कि उसके समक्ष जो बैठी है, वह ‘महिला’/’अभ्यर्थिनी’ है। वही प्राश्निक ‘नेशनलिज़्म की परिभाषाएँ चल रही हैं’ का प्रयोग कर रहा है।

प्रश्न है, परिभाषाएँ चलती भी हैं क्या? इस शब्दप्रयोग को किस ‘शब्दशक्ति’ के अन्तर्गत स्थान दिया जायेगा?

◆ चौथे क्रम की महिला प्राश्निक प्रत्येक प्रश्न-प्रतिप्रश्न में ‘अअअ’ करके अटकती दिख रही है। उसने ‘स्वेच्छा’ का ‘स्वैक्षा’, ‘लोकप्रिय’ का ‘लोक्प्रिय’, ‘ठीक है का ‘ठिक्’ है’, ‘पहले को ‘पेहले’, ‘चाहिए’ को ‘चहिए’ उच्चरित कर, कथित छद्म साक्षात् परीक्षण के स्तर को अति निम्न रूप दे दिया है।

◆ पाँचवें और अन्तिम क्रम के प्राश्निक के वाक्यविन्यास पर विचार करें। वह अपने एक प्रश्न के अन्तर्गत कहता है, “हाल ही में भारत-सरकार का एक प्रोजेक्ट है”, क्या यह वाक्यविन्यास शुद्ध है? वही एक महिला से प्रश्न करता है, “आप कैसे देखते हैं?” एक और प्रश्नात्मक वाक्य देखें, “उससे क्या फ़ायदा है? मुझे बताइए।”

अब प्रतिप्रश्न है, जो प्रश्न कर रहा है, उत्तर तो उसी को सम्बोधित करते हुए दिया जायेगा न? ऐसे में, “मुझे बताइए।” का प्रयोग सर्वथा अनुचित है। उसी परीक्षक ने ‘फ’ को ‘फ़’, ‘क्षेत्रफल’ को ‘छेत्रफ़ल’ कहा है। इनके अतिरिक्त अन्य कई शब्दों के अशुद्ध उच्चारण किये हैं।

भाषा और व्याकरण-स्तर पर उपर्युक्त पाँचों प्राश्निक/परीक्षक हमारी पाठशाला के निकष पर विफल सिद्ध किये जाते हैं।

● यदि इसी प्रकार की अशुद्धियाँ हमारे विद्यार्थी करेंगे तो यही परीक्षक उनकी ‘भाषिक’ अयोग्यता मानकर, उन्हें अंक नहीं देंगे। ऐसे में, प्रश्न है, इसके लिए दोषी कौन है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० नवम्बर, २०२१ ईसवी।)