सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

विषय– जन्मदिन बनाम जन्मतिथि/जन्मदिनांक

ऐसा ज्ञान, जो आपको इस पाठशाला के अतिरिक्त कहीं नहीं मिलनेवाला है। इसे हम वर्षों से बताते-समझाते आ रहे हैं; परन्तु प्रत्येक कुएँ मे डाली गयी भाँग को बाहर लाकर उस ‘कुएँ’ को परिष्कृत कर, ‘कूप’ का रूप देने मे समय लगता है।

 आप जिस दिन पैदा हुए थे उस दिन का 'दिन' कभी ('कभी भी' अशुद्ध है।) आता नहीं (अपवादस्वरूप कभी आ सकता है।); परन्तु आप जिस तिथि/तारीख़/दिनांक को उत्पन्न हुए थे, वह 'अवश्य' आता है। आप तारीख़ के अनुसार ही कथित 'जन्मदिन' के नाम से समारोह का आयोजन करते हैं, जो कि अनुपयुक्त है। आपके प्रवेशपत्र, सेवा-आवेदनपत्रादिक मे 'जन-तिथि' मुद्रित रहता है, न कि 'जन्म-दिन', क्यों? इस पर कभी विचार किया है?

इस निश्शुल्क (‘नि:शुल्क’ अशुद्ध है।) ज्ञान को मुक्त भाव के साथ अपने परिचितों के पास भेजें और बतायें– जन्मदिन/जन्म-दिन (Birthday) अशुद्ध और अनुपयुक्त प्रयोग हैं, जबकि ‘जन्मतिथि/जन्म-तिथि/जन्मदिनांक (‘दिनाँक’ अशुद्ध है।) (Birthdate) शुद्ध हैं।