मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

यह है, न्यू इण्डिया के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का चरित्र

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

इन दिनों ‘जुम्लेबाज़ दी ग्रेट’ नरेन्द्र मोदी बिहार के चुनावी सभाओं में जाकर केवल एक राग अलाप रहे हैं– कुछ लोग ‘भारत माता की जय’ बोलने का विरोध कर रहे हैं। मोदी यह नहीं बता पा रहे हैं– पिछले १५ वर्षों में नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य, शिक्षा तथा रोज़गार के क्षेत्रों में क्या-क्या किया है। सच तो यह है कि पिछले छ: वर्षों से नरेन्द्र मोदी अपनी कथनी और करनी से ही स्वयं ‘उपहास’ के पात्र बनते आ रहे हैं।

२५ अप्रैल,२०१९ ई० को दरभंगा के एक चुनावी सभा में नीतीश कुमार ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ नहीं कहा था, जबकि वहाँ उपस्थित एक-एक व्यक्ति कह रहा था। उसी मंच पर नरेन्द्र मोदी भी थे। ऐसे ही नीतीश कुमार को अपनी सियासत ज़रूरत को देखते हुए नरेन्द्र मोदी उनके साथ गलबँहिया करते देखे जा रहे हैं?

उल्लेखनीय है कि २५ अप्रैल, २०१९ ई० को जिस मंच से नरेन्द्र मोदी चिल्ला रहे थे कि जो नेता ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ नहीं बोलेगा, उसकी ज़मानत ज़ब्त हो जानी चाहिए, उसी मंच से जब सभी ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ बोल रहे थे तब नीतीश कुमार मौन बने रहे। जिस नीतीश कुमार ने अनुच्छेद ३७० को हटाने का खुले रूप में विरोध किया था, उसी के राज्य में अपना चेहरा लगवाकर और स्वयं जाकर नरेन्द्र मोदी जगह-जगह जाकर ‘भोट’ माँग रहे हैं। यह कैसा चरित्र है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ नवम्बर, २०२० ईसवी।)