परीक्षा विशेष : कैसे करें कर्मचारी चयन आयोग (SSC) अन्तर्गत आयोजित अनुवादक चयन परीक्षा, पेपर-2 की तैयारी

बिनय कुमार शुक्ल

नवंबर माह के दौरान कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अनुवादक चयन परीक्षा के पेपर-1 की परीक्षा का आयोजन किया गया था । इस परीक्षा में लगभग 12000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे । हालांकि इसके लिए लगभग 87 हजार आवेदन आए थे पर परीक्षा के कुछ दिन पूर्व कर्मचारी चयन आयोग ने यह घोषणा कर दी थी कि वर्ष 2019 के चयन परीक्षा में से प्राध्यापक के पद निरस्त किए जाते हैं । शायद इस घोषणा के कारण ऐसे अभ्यर्थी जो केवल प्राध्यापक के पद के लिए पात्र थे, उन्होंने परीक्षा न देना ही बेहतर समझा । आयोग द्वारा पेपर-1 की उत्तर कुंजी (answer key) भी बड़ी शीघ्रता से जारी कर दी गई, अब साथ ही फरवरी माह के दौरान इस परीक्षा के पेपर-2 की भी परीक्षा ली जाएगी । दिसंबर में अमूमन लोग छुट्टी के मूड में रहते हैं। जनवरी में इस छुट्टी की खुमारी खत्म होते होते 20-25 तारीख बीत जाता है । यदि इस हिसाब से देखें तो अभ्यर्थियों के पास गिने-चुने कुछ ही दिन बचे हुए हैं तैयारी के लिए । इस सीमित अवधि के दौरान हमारी यह चेष्टा हो कि कम समय में अधिक तैयारी की जा सके और फिर अच्छे अंक भी प्राप्त किया जा सके । चूंकि अंतिम परिणाम आने तक पदों की संख्या 200 तक ही सीमित रह जाती है, कई बार तो यह 110 का भी अंक नहीं छू पाती है अतः अधिकाधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी ही सफलता पा सकेंगे । इस अंक में हम कुछ विशेष बिंदुओं पर चर्चा करेंगे । इनका अनुपालन यदि अभ्यर्थी करते हैं तो उन्हें सफल होने से कोई रोक नहीं पाएगा ।

प्रश्न पत्र का विवरण :

पेपर 2 कुल 200 अंकों का होता है जिसमें चार प्रश्न होते हैं । हर प्रश्न के लिए 50 अंक निर्धारित होते हैं । हिंदी से अंग्रेजी में तथा अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद के लिए एक-एक अनुच्छेद(पैसेज) दिया जाता है । इसके अलावा अंग्रेजी और हिंदी में एक-एक निबंध लिखने के लिए दिया जाता है । इस निबंध के लिए 500 शब्दों की सीमा निर्धारित होती है, साथ ही यह अनुदेश भी होता है कि 500 शब्दों से अधिक लिखने पर अंक काटे भी जा सकते हैं । निबंध के लिए दोनों भाषाओं में चार-चार विषय दिया जाता है जिसमें से दोनों भाषाओं में से एक-एक विषय पर निबंध लिखना होता है । प्रश्नपत्र हल करने के लिए जो उत्तर पुस्तिका दी जाती है उसमें अनुवाद तथा निबंध लिखने के लिए स्थान तथा पृष्ठ निर्धारित होते हैं । यदि प्रतिभागी शब्दों की सीमा की मर्यादा रख पाता है तो इस उत्तर पुस्तिका से काम चल जाता है । अलग से अतिरिक्त पन्ने देने का कोई प्रावधान नहीं होता है । इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागी उत्तर पुस्तिका में अपना उत्तर लिखना प्रारंभ करे ।

समय प्रबंधन :

किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए समय प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यदि प्रतिभागी सही तरीके से समय प्रबंधन कर सका तो उसका कोई भी प्रश्न अनुत्तरित नहीं रह जाएगा और फिर वह आशातीत सफलता पा सकता है । जो प्रतिभागी समय प्रबंधन नहीं कर पाते उनके अनेक प्रश्न अंत तक अनुत्तरित रह जाते हैं और फिर जब कम प्रश्न हल किया जाए तो अच्छे अंकों की आशा कैसे की जा सकती है । इस परीक्षा में समय प्रबंधन का सबसे सुगम तरीका है हर प्रश्न के लिए आधे घंटे का समय निर्धारित कर लेना । इस प्रकार अनुवाद तथा निबंध दोनों के लिए एक-एक घंटा निर्धारित कर इसी समय सीमा में प्रश्न हल करने का प्रयास करें । हाँ, एक बात और है, कई बार परीक्षा भवन में आपको घड़ी ले जाने की अनुमति नहीं होती है तथा कई बार ऐसा भी देखा गया है कि परीक्षा कक्ष में भी घड़ी नहीं होती है । इस विषम परिस्थिति में समय प्रबंधन का अभ्यास आपको आज से करना प्रारंभ कर देना होगा ताकि आप पूर्ण रूप से तथा सही सही समस्त प्रश्न हल कर सकें । ऐसी विषम परिस्थिति में परीक्षा कक्ष में उपस्थित पर्यवेक्षक (इनविजिलेटर) से आप समय पूछ सकते हैं ।

अनुवाद :

अधिकांशतः पेपर-2 में अनुवाद के लिए दी गई सामग्री किसी सामाजिक पहलू अथवा किसी महापुरुष के जीवन चरित्र का अंश होता है । अमूमन अनुवाद के लिए आसान सामग्री ही दी जाती है, पर जब भी आसान सामग्री का अनुवाद करना होता है, अधिकांश प्रतिभागी अनुवाद सिद्धांतों तथा अनुवाद विधि का अनदेखा कर फ्री-स्टाइल अनुवाद करने लगते हैं । इस फ्री-स्टाइल अनुवाद के कारण श्रोत भाषा की सामग्री के मूल तत्व कई बार अनदेखा कर दिए जाते हैं । अब चूंकि समयाभाव के कारण अभ्यर्थी अपने अनुवाद की समीक्षा नहीं कर पाता है तथा जहां अनुवाद किया गया है उसमें काट-पीट तथा संशोधन करने पर गलतियाँ और अधिक हो जाती हैं। इन गलतियों के कारण अनुवाद में अभ्यर्थी को कम अंक मिलता है । इस समस्या के निवारण के लिए अभ्यर्थी को अनुवाद के लिए निर्धारित आधे घंटे में से कम से कम दस मिनट उत्तर पुस्तिका के रफ पृष्ठ पर अनुवाद का ढांचा बनाकर वाक्य विन्यास, शब्द चयन, व्याकरण का ध्यान रखते हुए सामग्री का अनुवाद कर उसकी समीक्षा कर लेनी चाहिए । अपने अनुवाद से पूर्णरूपेण संतुष्ट होने के बाद अनूदित सामग्री को उत्तर पुस्तिका में सही स्थान पर साफ-साफ लिखें । यदि मन-ही-मन आप सटीक अनुवाद करने के अभ्यस्त हों तो ही सीधे-सीधे उत्तर पुस्तिका में अनुवाद करना प्रारंभ करें, अन्यथा रफ-वर्क कर लेना अत्यावश्यक होगा । अनुवाद करते समय कभी भी टेन्स/काल तथा वाक्य संरचना के प्रारूप को न भूलें । यदि मिल सके तो योजना या कुरुक्षेत्र पत्रिका के हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करण की पत्रिका ले लें । हिंदी वाले से अंग्रेजी में तथा अंग्रेजी वाली से हिंदी में अनुवाद का प्रयास करें । बाद में अनूदित अंश का मिलान पत्रिका के अनूदित संस्करण से कर लें । आपको अपनी कमी का आसानी से आभास हो जाएगा तथा अच्छे अनुवाद का अनुभव भी हो पाएगा । जब आप इन पत्रिकाओं को पढ़ना शुरू करेंगे तो आपका अनुवाद के साथ ही विभिन्न विषयों का ज्ञान भी बढ़ेगा जो निबंध/अनुच्छेद लेखन में सहायक होगा ।

निबंध :

हिंदी और अंग्रेजी में एक-एक निबंध लिखने के लिए दिया जाता है । इसके लिए चार-चार विषय दिया जाता है । इन चार विषयों में से अभ्यर्थी को किसी एक विषय का चयन कर उस विषय पर लिखा होता है । यहाँ विषय का चयन सबसे महत्वपूर्ण कार्य है । ऐसा हो सकता है कि दिए गए विषयों में से आपको हर विषय की अच्छी जानकारी हो और आप किसी भी विषय पर धारा प्रवाह लिख सकें, फिर भी विषय का चयन बड़ी सावधानी से करें । आप वही विषय चुनें जिसके लिए आपके पास समुचित तथ्यात्मक डेटा उपलब्ध हो तथा लिखते समय आपके पास उस विषय वस्तु के लिए शब्द भंडार की कमी न हो । पर कई बार प्रश्नपत्र देखकर आपको ऐसा प्रतीत होगा कि दिए गए विषयों में से आपको किसी भी विषय पर सटीक जानकारी नहीं है तथा ऐसा महसूस होगा कि आप लिख नहीं पायेंगे । यही वह अवसर होगा जब आपको अपने अंदर सुप्त बैठे लेखक की प्रतिभा को जगाना होगा । 500 नहीं तो कम से कम 200 शब्द तो लिखना ही होगा । यहाँ भी विषय का चयन महत्वपूर्ण है । ऐसी परिस्थिति में आप दैनिक जीवन से जुड़े सामान्य विषय का चयन करें । पिछले दो वर्षों के अनुवादक चयन परीक्षा में हिंदी निबंध में (क) योग और जीवन (ख) भ्रष्टाचार मुक्त भारत (ग) सोशल मीडिया का प्रभाव (ग) परिवार का बदलता स्वरूप (घ) शिक्षा का निजीकरण (च) युवा वर्ग और विदेश (छ) उपभोक्तावादी संस्कृति (ज) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय दिया गया था तथा अंग्रेजी में (a) Digital Technology (b) Constitutional values in preamble (c)Cast inequality and justice (d) The goal of education (e) Democracy in India (f) The Cleanliness Project (g) Environmental issues (h) Village and their problems. इन विषयों को यदि ध्यान से देखें तो इनमें कुछ न कुछ ऐसे विषय हैं जिनपर कोई भी सौ-दो सौ शब्द लिख ही सकता है । यदि कुछ भी याद न आ रहा हो तो अपने आस पास उस विषय को रख कर सोचें कि यह क्या है और इससे हानि-लाभ क्या हो सकते हैं । यदि आपको कुछ विशेष बिन्दु लिखना और बताना हो तो उनके लिए अलग रंग की स्याही का प्रयोग कर सकते हैं या फिर समस्त विषय-वस्तु को कई हिस्सों में बांटकर बिन्दुवार अपनी प्रतिक्रिया लिख सकते हैं ।

लिखावट तथा भाषा की शुद्धता :

कुल मिलाकर लिखावट स्पष्ट हो, अक्षर बड़े-बड़े हों तथा भाषा एवं शब्दों की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें ।

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