हिन्दुत्व को जाने, दुनिया मे केवल हिन्दू ऐसा कहता है कि ईश्वर एक है

हिंदुत्व को न समझने वाले "पंक प्रक्षालन" करते हुए हिंदुत्व की अवधारणा को स्वीकारें

आलोक सिंह (हरदोई)-


मित्रों, मैं समझता हूँ,कि मेरी इस बात से कई लोग सहमत नहीं हो सकते ,किन्तु मुझे यह कहने में जरा भी संकोच नहीं कि भारत में रहने वाला प्रत्येक नागरिक सर्वप्रथम हिन्दू है। क्योंकि हिन्दू कोई धर्म नहीं अपितु एक अवधारणा है। अब मैं अपनी बात करता हूँ, मेरा धर्म “सनातन धर्म” है, किन्तु मैं हिन्दू हूँ। इसी तरह किसी भी जाति, धर्म या संप्रदाय का प्रत्येक व्यक्ति जो भारत का निवासी है हिन्दू है।

मैंने देखा है कि लोग हिंदुत्व का सही अर्थ नहीं समझते इसका श्रेय उन सभी राजनितिक दलों व मूढ़ मगज राजनीतिज्ञों को जाता है, जो अपने वोट बैंक के लिए हमेशा हिंदुत्व को हिन्दू बताते हैं। सर्वप्रथम यह बात समझना आवश्यक है कि हिंदुत्व कोई धर्म नहीं , यह एक विचारधारा है, जीवन पद्धति है, जो कि “वसुधैव कुटुम्बकम” के सिद्धांत पर आधारित है। हिंदुत्व कहता है “एकं सद्विपा बहुधा वदन्ति” अर्थात सत्य एक है लेकिन जीने के तरीके अलग -अलग हैं। दुनिया में केवल हिन्दू ऐसा कहता है कि ईश्वर एक है, वो कभी नहीं कहता कि सिख का भगवान, मुस्लिम का भगवान, ईसाई का भगवान वह हमेशा यही कहेगा ईश्वर एक है

इजराइल की एक आधिकारिक पुस्तक है, उसमे लिखा है कि ऐसा नहीं है केवल जर्मनी में हमारे ऊपर अत्याचार हुए, बल्कि हम जहाँ-जहाँ भी गए , विभिन्न धर्मों एवं जातियों के लोगों ने हमारे ऊपर अत्याचार किये लेकिन केवल हिंदुस्तान ऐसा देश है जहाँ ढाई हजार वर्ष के इतिहास में हम पर कोई अत्याचार नहीं हुआ। जब फ़ारसी हिंदुस्तान आये तो गुजरात में राजा बसते थे, उन्होंने राजा से आग्रह किया कि ये जो अग्नि हम लाये हैं और इसे हम जहाँ रखेंगे वहां 50 कि मी की सीमा में कोई गैर ईरानी नहीं रहना चाहिए। मतलब राजा हिन्दू और मांग गैर हिन्दू की और हिंदुत्व की महानता देखिये की राजा ने कहा कि आप प्रवेश कीजिए मैं यह सुनिश्चित करता हूँ कि इस सीमा में कोई प्रवेश न करेगा।

आज ये आतंकवाद जो इतनी तेजी से पूरे विश्व में पांव पसार रहा है और उसमें ब्रेन वाश करके धर्म के माध्यम से युवाओं को भड़काया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण यह कहना है कि मेरा संप्रदाय तेरे संप्रदाय से बेहतर या श्रेष्ठ है। जब ये भाव जागता है तभी विवाद पैदा होता है,और यही विवाद आतंकवाद तक ले जाने का कारण बनता है।

इस समूल सृष्टि में केवल हिंदुत्व ही सर्व समावेशी है, जो कहता है कि आप जिस ईश्वर को मानते हैं, मानिये। आपको अवश्य ही उनकी भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति होगी। यही मूल हिन्दू विचारधारा है। जो लोग इसे नहीं मानते हैं और इसी पर प्रश्न उठाते हैं, उन्हें हिंदुत्व में केवल हिन्दू नज़र आता है। हिंदुत्व जीवन जीने की शैली है,और समूचा विश्व इससे प्रभावित है। मैं अपने सभी भाई-बहनों से निवेदन करना चाहूंगा कि हिंदुत्व के सही अर्थ को संपूर्ण विश्व में फ़ैलाने में हिंदुत्व की मदद करें। अपेक्षा करता हूँ कि हिंदुत्व को न समझने वाले “पंक प्रक्षालन” करते हुए हिंदुत्व की अवधारणा को स्वीकारेंगे।