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हाईकोर्ट में लंबित संपत्ति-विवाद के बावुजूद भूमि का हुआ बैनामा, आपत्ति दर्ज होने के बाद प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

कछौना (हरदोई)। नगर पंचायत कछौना पतसेनी में विवादित संपत्तियों को औने-पौने दामों में खरीदने व बेशकीमती सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के लिए लोगों ने नजरें गड़ा रखी हैं, यही कारण है कि न्यायालय में विचाराधीन संपत्तियों के मामलों में भी खरीद-फरोख्त करने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा है। वादी और प्रतिवादी पक्ष के बीच उच्च न्यायालय में विचाराधीन विवादित भूमि के मामले में सच्चाई छुपाकर अवैध रूप से रजिस्ट्री/बैनामा किये जाने के संबंध में वादी पक्ष ने आपत्ति दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उक्त प्रकरण में जनप्रतिनिधियों ने भी संज्ञान लेते हुए मामले की जांचकर संलिप्त दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हेतु प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है।

ताजा मामला एक बार फिर नगर पंचायत कछौना पतसेनी से ही संबंधित है जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर में गाटा संख्या 49 से संबंधित संपत्ति विवाद का प्रकरण(61/2009) उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन होने के बावजूद भी कुछ रकबे पर लोगों ने अवैध तरीके से बैनामा करा लिया। अभिलेखों के अनुसार उक्त भूखंड की स्वामिनी विनीता उर्फ विनीता ठाकुर ने पांच लोगों, जिसमें अखिलेश कुमार गुप्ता, धर्मेंद्र सिंह, आशू सिंह, विजयलक्ष्मी सिंह व हिमांशु सेंगऱ आदि सम्मिलित हैं, के नाम अवैध रूप से बिक्री/बैनामा कर दिया था। जिस पर प्रकरण में वादी पक्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वर्तमान अधीक्षक किसलय बाजपेई ने मामला संज्ञान में आने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है, साथ ही उन्होंने मुख्य स्थाई समिति द्वारा संबंधित वाद की त्वरित पैरवी कराने व दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की है। प्रकरण में तत्कालीन डीएम द्वारा जांच के आदेश होने के बाद कार्रवाई होने के भय से मामले में संलिप्त लोग अब सकते में हैं और जांच की आंच से बचने के लिए राजनैतिक तथा रसूखदार लोगों से पैरवी कराने में जुटे हैं। यहां यह भी गौरतलब है कि विवादित संपत्ति का मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होने की स्थिति में संपत्ति का किसी रूप में अंतरण होना ‘संपत्ति अंतरण अधिनियम-1882’ के अंतर्गत कानूनन अवैध और शून्य करार दिया जाता है।

इस संदर्भ में बालामऊ विधायक रामपाल वर्मा का कहना है कि संबंधित प्रकरण में जिलाधिकारी द्वारा अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया है। जांच विचाराधीन है और रिपोर्ट आने पर जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं हरदोई से विधान परिषद सदस्य अशोक अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले में संलिप्त दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उक्त मामले में शिकायतकर्ता रहे व नगर पंचायत कछौना पतसेनी के नामित सभासद ब्रह्म कुमार सिंह ने बताया कि सीएचसी परिसर में स्थित भूखंड पर विवाद में न्यायालयों द्वारा कई बार सीएचसी के पक्ष में ही फैसले आए हैं। एक प्रकार से वो जमीन सरकारी जमीन के रूप में ही परिभाषित की जाएगी और खरीद-बिक्री होना निंदनीय कृत्य की श्रेणी में माना जाएगा। विभागीय पैरवी में शिथिलता बरतने व न्यायालय द्वारा सीएचसी के पक्ष में आए फैसलों के बावजूद भी वादी पक्ष द्वारा अमल-दरामद ना कराने के चलते ही ये विवाद आज एक नए रूप में सामने है।

बताते चलें कि नगर पंचायत कछौना पतसेनी में इस तरह से अवैध कब्जे से संबंधित कई मामले प्रकाश में आए हैं। कालांतर में बेशकीमती सरकारी जमीनों को अन्य जगहों/समीपवर्ती ग्राम पंचायतों की दर्शाकर किए गए 11 अवैध/आवासीय पट्टे (गाटा संख्या 2030, 1714, 1793) के मामले में नायब तहसीलदार ने संबंधित लेखपाल पर एफआईआर भी दर्ज कराई थी। कई मामलों में नगर पंचायत की जमीनों पर अवैध कब्जे के संबंध में नगर पंचायत प्रशासन द्वारा प्रभावी पैरवी ना करने के चलते संबंधित वाद अदम पैरवी में खारिज होते रहे हैं।

रिपोर्ट ➖ एस.बी.सिंह सेंगऱ