कान पकाती सदाबहार ज़ुम्लेबाज़ी

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आरोपी (यहाँ शुद्ध और उपयुक्त शब्द ‘आरोपित’ है।) पकड़ लिये गये हैं; गिरफ़्तारी (शुद्ध शब्द ‘गिरिफ़्तारी’ है।) हो गयी है; निलम्बित किये गये हैं; जाँच के आदेश दे दिये गये हैं; क़ानून अपना काम करेगा; कोई बख्शा नहीं जायेगा; पीड़ित पक्ष की माँग पर सीबीआई (शुद्ध संक्षेपण ‘सी० बी० आई०’ है।) को मामला सौंप दिया जायेगा; जाँच बैठा दी गयी है; आयोग बना दिया गया है, समिति गठित कर दी गयी है; २४ घण्टे के अन्दर आरोपी को पकड़ लिया जायेगा;, अल्टिमेटम दे दिया गया है आदिक-आदिक ज़ुम्ले कानों में ‘पिघलते’ हुए सीसे की तरह से असर करते हैं। हमारे सामाजिक व्यवस्थापक कितने निकम्मे हो चुके हैं, ये सभी शब्दावली चीख़-चीख़ कर सुना रही हैं।

यही कारण है कि ‘न्यू इण्डिया’ में “डंके की चोट पर” सर्वत्र भाँति-भाँति के अपराधों की खेती की जा रही है और सुरक्षातन्त्र ‘बौना’ बना रेंगता दिखता आ रहा है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ फ़रवरी, २०२१ ईसवी।)