सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

मल्लावां में बसपा छोड़ बाकी ने कभी नहीं उतारा आधी दुनिया को मैदान में

Shyam Ji Gupta
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विधायी और संसदीय सियासत में आधी आबादी को 33% आरक्षण अभी लटका हुआ है। हालांकि, भाजपा का दावा है कि अपने संगठन में वह 33% पदों पर आधी आबादी को भागीदारी देती है। लेकिन, बात विधानसभा चुनाव की आई तो महज एक टिकट शाहाबाद से महिला को दिया, जबकि शायद ही कोई सीट हो जहां से महिलाओं की सिम्बल पर दावेदारी नहीं रही हो। वहीं, महिला आरक्षण की मुखर विरोधी मानी जाने वाली सपा ने 02 सीटों पर महिलाओं को उतारा है। बसपा ने भी उन्हीं सीटों पर महिला उम्मीदवार दिए हैं, जहां सपा ने। भाजपा ने शाहाबाद और सपा-बसपा ने दो सुरक्षित सीटों गोपामऊ और बालामऊ से महिला प्रत्याशी उतारीं हैं। अतीत में क्या रहा है हरदोई की सियासत में आधी दुनिया का स्टेटस, रपट देखें।

1951 में पहली विधानसभा में कांग्रेस के सिम्बल पर तत्कालीन सण्डीला कम साउथ ईस्ट बिलग्राम असेम्बली कॉन्सीट्वेंसी से रानी लक्ष्मी देवी 28,165 मत हासिलकर जीतीं थीं। 1957 में दूसरी विधानसभा में शाहाबाद से कांग्रेस की विद्यावती बाजपेयी 41,781 मतों के साथ जीतीं थीं। 1962 में तीसरी विधानसभा में बिलग्राम से कांग्रेस की कलारानी मिश्रा 15,880 मत लेकर जीतीं ही नहीं, बल्कि जीत की हैट्रिक जमाई। वह 1967 में 21,401 और 1969 में 18,647 मतों के साथ चौथी और पांचवीं विधानसभा पहुंची। 1974 में वह हारकर तीसरे स्थान पर पहुंच गईं थी और उसके बाद इस सीट पर आधी आबादी की जीत का सूखा 2008 के उपचुनाव में बसपा की रजनी तिवारी ने ख़त्म किया। रजनी 92,196 मतों के साथ 15वीं विधानसभा पहुंचीं थीं।

1969 में पांचवीं विधानसभा में पहली बार ज़िले से 03 महिला पहुंचीं। बिलग्राम से कलारानी मिश्रा के अलावा हरदोई सदर से कांग्रेस की आशा सिंह 19,392 और सण्डीला से कांग्रेस की बेगम कुदशिया एजाज़ रसूल 32,031 मत लेकर जीतीं थीं। 1974 में छठी विधानसभा में ज़िले से महिलाओं का प्रतिनिधित्व शून्य रहा। 1977 की कांग्रेस विरोधी लहर में बेगम कुदशिया एजाज़ रसूल निर्दल उतरीं और 22,855 मत लेकर सातवीं विधानसभा में पहुंचीं। 1980 में आठवीं विधानसभा में ज़िले से 02 महिला पहुंचीं। सण्डीला से कांग्रेस की बेगम कुदशिया एजाज़ रसूल 24,137 और पिहानी से कांग्रेस की कमला सिंह 17,659 मत लेकर जीतीं थीं। बेगम को तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मन्त्री पद से भी नवाज़ा गया था।

1985 की नवीं विधानसभा में लगातार दूसरी दफ़ा ज़िले से 02 महिला पहुंचीं। सण्डीला से कांग्रेस की बेगम कुदशिया एजाज़ रसूल 27,568 और हरदोई सदर से कांग्रेस की उमा त्रिपाठी 24,039 मत लेकर जीतीं थीं। बेगम के लिए यह चुनाव इस मायने में ऐतिहासिक था कि उन्होंने हैट्रिक लगाकर कलारानी मिश्रा के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। लेकिन, 1989 में 10वीं और 1991 में 11वीं विधानसभा के चुनाव में बेगम कुदशिया एजाज़ रसूल हारकर दूसरे स्थान पर फिसल गईं और साथ ही ज़िले से आधी आबादी का विधानसभा में प्रतिनिधित्व भी शून्य हो गया।

1993 में 12वीं विधानसभा का चुनाव ऐतिहासिक रहा। न केवल चौथी बार ज़िले से 02 महिलाओं का विधानसभा में प्रतिनिधित्व रहा, बल्कि पहली बार ज़िले से दलित महिलाएं विधानसभा पहुंचीं। बेनीगंज (सु0) से सपा की सुशीला सरोज 40,064 और अहिरोरी (सु0) से सपा की जदुरानी देवी 36,431 मत लेकर जीतीं थीं। पहली बार विधायक बनीं सुशीला तो तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार में राज्यमन्त्री भी बनाईं गईं थीं। 1996 में 13वीं विधानसभा में ज़िले से आधी आबादी का प्रतिनिधित्व चौथी मर्तबा शून्य हुआ। बेनीगंज से भाजपा की सुशीला सरोज हारकर दूसरे और अहिरोरी से सपा की जदुरानी देवी हारकर तीसरे स्थान पर पहुंच गईं थीं।

नई सदी में 2002 में 14वीं विधानसभा में ऊषा वर्मा की सूरत में ज़िले से आधी आबादी को प्रतिनिधित्व मिला। वह अहिरोरी (सु0) से सपा के सिम्बल पर 47,799 मत लेकर जीतीं और तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार में मन्त्री बनाईं गईं थीं। परिसीमन से पहले 2007 में 15वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बावन-हरियावां (सु0) से बसपा की राजेश्वरी देवी 51,633 मत लेकर जीतीं थीं। बाद में 2008 में बिलग्राम सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा की रजनी तिवारी जीतीं और ज़िले से विधानसभा में 02 महिलाओं का प्रतिनिधित्व हो गया।

परिसीमन के बाद 2012 में 16वीं विधानसभा में ज़िले से 02 महिलाएं पहुंचीं। नवसृजित सवायजपुर सीट से बसपा की रजनी तिवारी 49,099 और नवसृजित साण्डी (सु0) सीट से सपा की राजेश्वरी देवी 66,325 मत लेकर जीतीं थीं। 2017 में 17वीं विधानसभा के चुनाव में शाहाबाद से भाजपा की रजनी तिवारी, गोपामऊ से सपा की राजेश्वरी देवी व बसपा की मीना कुमारी और बालामऊ से सपा की सुशीला सरोज व बसपा की डॉ0 नीलू सत्यार्थी की सूरत में कुल 05 दलीय महिला उम्मीदवार मैदान में हैं देखने की बात होगी कि अबकी गठित होने वाली विधानसभा में ज़िले से आधी आबादी की कितनी भागीदारी होगी और क्या चौथी मर्तबा किसी महिला को ‘लालबत्ती’ का रसूख मिलेगा ???

तथ्य ये भी  ; मल्लावां क्षेत्र में 1991 में 11वीं विधानसभा के चुनाव में बसपा ने रमाकान्ती को मैदान में उतारा था। वह 5130 मत के साथ पांचवें पायदान पर रहीं थीं। एक बार बसपा के अलावा किसी राजनीतिक दल ने इस सीट पर महिलाओं को कभी उम्मीदवार नहीं बनाया।