सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

जब रौशनी की सबसे ज्यादा जरुरत होती है तब होती नहीं

    सुधान्शु बाजपेयी (युवा पत्रकार/चिन्तक)-

सेवा में,
माननीय योगीजी ।
मुख्यमंत्री उप्र शासन ।
महोदय, आज आपनें लाइट और रसोईगैस कनेक्शन वाले घरों को कैरोसीन सब्सिडी न देनें का फरमान दिया है। मगर आपको एक सच्ची बात बताता हूँ ,आप शहरों में रहने वाले बङे लोग हैं,जो आपको नहीं मालूम होगी। बचपन से लेकर आज तक काम के समय लाइट आते हुए नहीं देखी, शाम 5 बजे से रात 10 बजे जब रौशनी की सबसे ज्यादा जरुरत होती है तब भी नहीं।
कैरोसीन की ढिबरी के उजालें में ही हमारी माँ आज भी लकङी वाले चूल्हे से खाना पकाती है। मोदीजी की माँ को भले ही राहत मिल गयी हो मगर गाँवों में सभी माँ आज भी उसी पर खाना पकाती हैं,क्योंकि एलपीजी बहुत मँहगी पङती है।
उसी ढिबरी के उजालें में ही पढकर गाँव से हम लोग शहर पहुंचते हैं क्योंकि लाइट आती भी थी तो रात 11बजे के बाद या वो भी नहीं और बताएं गर्मियों में घरों में पंखे टंगें हैं मगर दोपहर में लाइट नहीं आती है ,बगल वाले पीपल का ही सहारा होता है।ऊपर से कभी ट्रांसफार्मर फुंक जाये जो अक्सर होता है तो हफ्ते से पहले नहीं सुधरता।
कुलमिलाकर हम यह कह रहे कि आपने वादा भी किया है 18घंटे लाइट का,वो कम भले आये मगर सही समय पर आये जब सबसे ज्यादा जरुरत होती है,यह जब सुनिश्चित कर पाइयेगा तभी ये सब्सिडी बंद करना ।वर्ना गांवो में, गरीबों के घर अंधेरा हो जाएगा, जिस तरह महंगी रसोईं गैस वो नहीं जला पाते,उसी तरह महंगा कैरोसीन भी न खरीद पायेंगें।

आपका
गंवईं नागरिक !