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धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान का श्री राम के रुप में हुआ था अवतार

भगवान श्री राम का जीवन महान आदर्शों और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देता है : श्री हामिद अंसारी

आदित्य त्रिपाठी (उप सम्पादक indianvoice24)-


राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्  तुल्यं राम नाम वरानने ॥

रामनवमी का पर्व आज देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में परंपरागत धार्मिक श्रद्धा और उल्‍लास के साथ मनाया गया। यह पर्व भगवान श्रीराम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में नवरात्र के नौवें दिन मनाया जाता है । त्रेतायुग में रावण के अत्याचारो को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्री राम के रुप में अवतार लिया था । अयोध्‍या तथा अन्‍य शहरों में मंदिरों को शानदार ढंग से सजाया गया है। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दी हैं।

चैत्र शुक्ल की नवमी तिथि को मंगलवार के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में कौशल्या और राजा दशरथ के पुत्र रूप मेंश्री राम अवतरित हुए । वैज्ञानिक शोधकर्ताओं के अनुसार प्रभु राम का जन्म काल वाल्मीकि द्वारा बताए गए ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर  4 दिसंबर 7323 ईसा पूर्व अर्थात आज से 9339 वर्ष पूर्व बताता है ।  शोधकर्ता डॉ. वर्तक पीवी वर्तक के अनुसार ऐसी स्थिति 7323 ईसा पूर्व दिसंबर में ही निर्मित हुई थी । लेकिन प्रोफेसर तोबयस के अनुसार जन्म के ग्रहों के विन्यास के आधार पर श्रीराम का जन्म 7130 वर्ष पूर्व अर्थात 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व हुआ था। उनके अनुसार ऐसी आका‍शीय स्थिति तब भी बनी थी। तब 12 बजकर 25 मिनट पर आकाश में ऐसा ही दृष्य था जो कि वाल्मीकि रामायण के बाल कांड में 18/श्लोक 8, 9  में वर्णित है । ज्यातादर शोधकर्ता प्रोफेसर तोबयस के शोध से सहमत हैं। इसका मतलब यह कि राम का जन्म 10 जनवरी को 12 बजकर 25 मिनट पर 5114 ईसा पूर्व हुआ था ।