थाना अलापुर, बदायूँ के रमनगला में आपराधिक प्रवृत्ति के एक युवक का शव बरामद

प्रिये तुम्हारे प्रेम पत्र का, हर अक्षर आधार बन गया

जगन्नाथ शुक्ल….✍ (प्रयागराज)

प्रिये तुम्हारे प्रेम पत्र का ,
हर अक्षर आधार बन गया।
भावों की जो बनी तूलिका,
उस में ही संसार बस गया।।

चढ़ते सूरज की किरणों सङ्ग,
राग हमारा गहराया है।
आते – जाते काला बादल,
छा जाने पर शरमाया है।।
एकाकी मन हुआ समाहित,
ख़ालीपन का भार घट गया;
भावों की जो बनी तूलिका,
उस में ही संसार बस गया।।

अधरों की तृष्णाएँ बीती,
उर का वीरानापन छूटा।
सपनों ने सच-रूप धरा तो;
ख़ुशियों का ये अंकुर फूटा।
फैली मन में छटा वसन्ती,
प्रेमलसित परिवार सज गया।
भावों की जो बनी तूलिका,
उस में ही संसार बस गया।।

पंखुड़ियों ने मौन त्यजा तो
नीलकमल कलिका मुसकाई;
भ्रम-अवमुक्त हुआ भौंरा जब,
नयनों में ख़ुशियाँ इतराईं।
साँझ नहीं ढलने पायेगी;
जनम-जनम का प्यार मिल गया।
भावों की जो बनी तूलिका,
उस में ही संसार बस गया।।

url and counting visits