धर्म की धज्जियाँ उड़ाती मध्यप्रदेश-सरकार!..?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद;


सम्पूर्ण देश में जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी तथाकथित धर्म का आश्रय लेकर देश की मूल राजनीति को ध्वस्त करते हुए, नयी स्थापना करने की ओर बढ़ रही है, वह अन्तत:, देश को पुनर्विभाजित करने का एक षड्यन्त्रमात्र के रूप में लक्षित हो रहा है, क्योंकि यह पार्टी नितान्त सन्देहास्पद, संकुचित तथा स्वार्थी है।

इसी सन्दर्भ में भारतीय जनता पार्टी-शासित मध्यप्रदेश में वहाँ के मुख्य मन्त्री शिवराज सिंह चौहान की कलुषित मन:दशा को समझा जाता है, और वह यह कि मध्यप्रदेश के पाँच ‘साधुओं’ को ‘राज्यमन्त्री’ के समकक्ष ‘राजनीतिक’ स्थान दे दिया गया है, जिनमें से एक ‘कम्प्यूटर बाबा’ है, जिसने शिवराज सिंह की ग़लत नीतियों के विरोध अपना अभियान छेड़ रखा था। अब उसके आगे ‘एक टुकड़ा’ फेंक दिया गया और आगे बढ़कर उसने ‘लपक’ लिया है।

उल्लेखनीय है कि निकट भविष्य में मध्यप्रदेश-विधानसभा का चुनाव होना है और धार्मिक-साम्प्रदायिक क्षेत्रों में टुकड़े फेंककर स्वार्थ के तवे पर शिवराज सिंह बहुमत की रोटियाँ सेंकने में लगे हैं, जो पूर्णत: राष्ट्रघाती है।

इसका दुष्प्रभाव इस रूप में दिखेगा कि बाबा लोग अपने मूल कर्म से हटकर अब राजनीति का उपभोग करेंगे और अपनी दमित-दलित इच्छाओं की पूर्ति कर, शेष रह गयी सात्त्विक राजनीतिक अंश के भी साथ बलप्रयोग करते हुए, राजनीति को सम्पूर्णत: कलुषित करेंगे। अन्य राज्यों के बाबा लोग भी अब ‘राज्यमन्त्री’ बनने का अलख जगाते हुए दिखेंगे।