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कल पिहानी ब्लॉक डेवलपमेंट काउन्सिल बोर्ड बैठक हंगामी होने के आसार

अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस पॉलिटिकल अफेयर्स डेस्क-
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कल ज़िला पंचायत बोर्ड बैठक में आसन पर आसीन होने को लेकर हुई रार-तक़रार को लेकर चखचख अभी जारी है। इस बीच पिहानी क्षेत्र पंचायत बोर्ड की कल होने वाली बैठक का जो एजेण्डा जारी हुआ है, उसने सम्भावित टकराव की आहट दे दी है। काउन्सिल के कार्य पालक अधिकारी द्वारा जारी 05 सूत्रीय एजेण्डा में 05 जून 2012 के शासनादेश संख्या 1413 का हवाला देते हुए बैठक में चुने हुए प्रतिनिधियों के ही प्रतिभाग कर पाने की बात जोड़ी गई है।

ब्लॉक के कार्य पालक अधिकारी द्वारा जारी एजेण्डा और उसमे दिए गए शासनादेश के हवाले पर पूर्व प्रमुख श्रवण बाजपेयी व जिला सहकारी बैंक के निदेशक कुशी बाजपेयी ने सवाल उठाया है। कुशी अपनी बीडीसी मेम्बर माता संतोष बाजपेयी के प्रतिनिधि हैं। उनका कहना है कि प्रमुख सरिता गुप्ता के पति पूर्व प्रमुख जेपी गुप्ता गैर प्रान्त की शराब पकड़े जाने के मामले के अभियुक्त हैं और उनके विरुद्ध गिरफ़्तारी वारन्ट है। पिछली बैठक के दौरान जब पुलिस उन्हें फ़रार बता रही थी, तब वह बोर्ड बैठक के आसन पर आसीन थे, तब जबकि वह सदन के सदस्य नहीं हैं। ये मामला समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था।

कुशी कहते हैं, सियासी हवा क्या बदली कि जेपी की हवा #शंट है। अब उनके इशारे पर ब्लॉक के कार्य पालक अधिकारी को राजाज्ञा की तारीख़ और संख्या स्मरण हो आई है। लेकिन, अब मनमानी नहीं चलेगी और अव्यवस्था का पुरज़ोर विरोध होगा। कहा कि ब्लॉक के अफसरों को जवाब इसका भी देना होगा कि पिछली बैठक में कथित तौर पर फ़रार जेपी आसन पर थे तो उन्होंने सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी। कुशी ने कार्य पालक अधिकारी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 212 व 216 के तहत कार्यवाही का पुलिस पर दबाव बनाने का संकेत भी दिया।

वहीं, ब्लॉक डेवलपमेंट काउन्सिल की सदस्य संतोष बाजपेयी सहित 05 सदस्यों सुमन द्विवेदी, उदयवीर सिंह, हरनाम सिंह और अयूब खां ने मुख्यमंत्री को 05 सूत्रीय मांगपत्र भेजा है। मांग की गई है कि बोर्ड की नियमित बैठक हो। बोर्ड द्वारा एक साल में कराए कामों की उच्च स्तरीय जांच हो। बीडीसी सदस्यों का मानदेय ₹05 हजार हो और शस्त्र लाइसेन्स जारी होने में प्राथमिकता मिले। प्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की समय सीमा 01 वर्ष की जाए। अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में आधे से एक अधिक सदस्यों का मत पड़ने पर प्रस्ताव पारित माना जाए।