संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

चिन्तन-अनुचिन्तन

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

मनसा-वाचा-कर्मणा सुदृढ़ मानसवाला मनुष्य हर किसी को रास नहीं आता; क्योंकि वह प्रत्येक सत्य को ‘सत्य’ के साथ निर्लिप्त भाव के साथ कहता है; उसके कथन और कर्म में कोई भेद नहीं होता। लक्ष्य-संधान करते समय उसे कंटकाकीर्ण पथ को प्रशस्त कर अग्रसर होना पड़ता है। कोई अदृश्य शक्ति उसकी धैर्य की परीक्षा करती रहती है। ऐसे में, मनुष्य को सन्तुलित होकर अपने कर्म के प्रति तत्पर, सन्नद्ध तथा सजग रहना चाहिए; मनुष्य का यही परम धर्म है; अन्ततः, विजयश्री उसका कण्ठहार बन जाती है और जीवन के कर्म-क्षेत्र का ‘महारथी’ वही होता है। हाँ, मृत्यूपरान्त भी उसका वही सत्य उसके साथ बना रहता है।