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ग्राम प्रधान के खेत में प्रवासी मज़दूरों ने नहीं डाली गोबर की खाद, इसलिए नहीं मिला उन्हें मनरेगा में काम

प्रेम द्विवेदी :

ब्लॉक अहिरोरी क्षेत्र के अंतर्गत ग्रामसभा मंगोलापुर में बीते चार दिनों से मनरेगा कार्य के तहत नदी के किनारे बने गोशाला में खाई चढ़ाने व साफ सफ़ाई का कार्य चल रहा था । जिसमे बाहर से आए हुए प्रवासी मजदूर काम कर रहे थे ।जिससे कि लॉकडाउन के चलते किसी तरह उनके परिवारों का पेट भर सके । लेकिन ग्राम प्रधान के तानाशाही रवैये के आगे प्रवासी मजदूर परेशान हो गए और मनरेगा का अधूरा कार्य छोड़कर अपने-अपने घरों को चले गए ।

मजदूरों ने बताया कि ग्राम प्रधान इकबाल खान सभी मजदूरों से अपने खेत में गोबर की खाद डलवाने के लिए कह रहे थे । लेकिन मजदूरों ने ग्राम प्रधान के इस निजी काम को करने से इंकार कर दिया । मजदूरों ने बताया कि जब ग्राम प्रधान इकबाल खान ने अपने खेत में गोबर की खाद डालने के लिए कहा तो सभी मजदूरों ने ग्राम प्रधान के खेत में खाद डालने के लिए इंकार कर दिया । मजदूरों ने ग्राम प्रधान से कहा कि हम लोग मनरेगा के तहत सरकारी कार्य करने के लिए आए हैं और मनरेगा के तहत आने वाले सभी सरकारी कार्य ही करेंगे । इस बात से नाराज ग्राम प्रधान इक़बाल खान ने मजदूरों को धमकाते हुए कहा कि या तो सभी लोग मनरेगा का कार्य छोड़ दो वर्ना हमारा निजी काम भी करना पड़ेगा । इस बात को लेकर प्रवासी मजदूरों में रोष व्याप्त हो गया और सभी मजदूर मनरेगा कार्य अधूरा छोड़कर चले गए ।

मनरेगा के तहत कार्य कर रहे मजदूरों ने बताया कि ग्राम प्रधान के तानाशाही रवैए के कारण ग्राम सभा में मनरेगा के तहत कार्य कर पाना मुश्किल हो गया है । मजदूरों ने इस बात की शिकायत पुलिस से भी की । मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्राम प्रधान की हां में हां मिलाते हुए मजदूरों को ही दोषी ठहराया । जब मजदूरों ने ग्राम प्रधान के तानाशाही रवैये की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही तो ग्राम प्रधान ने प्रवासी मजदूरों विनोद कुमार, सतपाल, विपिन, चेतराम, जरोखर, अनिल, रघुनंदन, सोनू, भूरा, अंकित, नंदराम, धर्मगज, रामू, चांद मियां दीना आदि को धमकाते हुए कहा कि तुम लोग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे । दस बीस हजार रुपए में सभी मामले निपट जाते हैं ।

ग्राम प्रधान के इस तानाशाही रवैये से दैनिक मजदूरों के सामने रोजी रोटी का सवाल खड़ा हो गया है । मजदूरों ने बताया कि देश भर में चल रहे लाॅकडाउन के कारण वह कहीं बाहर मजदूरी के लिए भी नहीं जा सकते, जिससे कि उनके घर में चूल्हा जल सके ।

अब सवाल ये उठता है कि क्या ब्लॉक से थोड़ी दूर स्थित इस ग्राम सभा में ग्राम प्रधान द्वारा की जा रही इस तरह की दबंगई ग्राम पंचायत अधिकारी व ब्लॉक के अधिकारियों को वाकई मालूम नहीं है या सभी अधिकारी जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश कर रहे हैं । जबकि इस ग्राम प्रधान पर कई बार ऐसे आरोप लग चुके हैं लेकिन प्रशासन द्वारा कभी कोई कार्यवाही ना होने से ग्रामीणों व मजदूरों के हौसले पस्त हैं । वहीं दूसरी तरफ इस दबंग ग्राम प्रधान के हौसले काफी बुलंद है । सवाल यह भी उठता है कि इतने दिनों से चल रहे मनरेगा कार्य के अचानक बंद हो जाने की जानकारी हो जाने के बाद भी ब्लॉक से लेकर जिले तक का कोई अधिकारी जांच के लिए आखिर अभी तक क्यों नहीं पहुंचा ? क्या प्रशासन वाकई अनजान है या जानबूझकर प्रशासन इस दबंग प्रधान को बढ़ावा दे रहा है ? खैर मामला कुछ भी हो लेकिन अगर प्रशासन ने मामले को तत्काल संज्ञान में नहीं लिया तो गरीबों के घरों के चूल्हे बुझने में देर नहीं लगेगी ।

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