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पिछली सरकारें भारतीय परंपरागत चिकित्‍सा पद्धतियों को प्रोत्‍साहन देने की बजाय उसे भूल गई : नरेन्‍द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज अफसोस व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि पिछली सरकारें भारतीय परंपरागत चिकित्‍सा पद्धतियों को प्रोत्‍साहन देने की बजाय उसे भूल गई। हरिद्वार में योगगुरू रामदेव की पंतजलि योगपीठ में शोध संस्‍थान के उद्घाटन अवसर पर श्री मोदी ने कहा कि आजादी से पहले और बाद के समय में स्‍वस्‍थ रहने की योग जैसी प्रणालियों और परंपरागत चिकित्‍सा पद्धतियों को प्रोत्‍साहित करने के लिए बहुत कम  प्रयास किये गए हैं।

श्री मोदी ने सुरक्षात्‍मक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल प्रणाली की आवश्‍यकता पर भी बल देते हुए कहा की इस दिशा में स्‍वच्‍छता की महत्‍वपूर्ण भूमिका हो सकती है। हम देश के लिए एक हेल्‍थ पॉलिसी लेकर के आए हैं। होलेस्‍टिक हेल्‍थ केयर का व्‍यूय लेके आए हैं और अब दुनिया सिर्फ हेल्‍दी रहना चाहती है ऐसा नहीं है। अब लोगों को वेलनेस चाहिए और इसलिए सॉल्‍युशन भी होलिस्‍टिक देने पड़ेंगे। प्रिवेंटिव हेल्‍थ केयर पर बल देना पड़ेगा, और प्रिवेंटिव हेल्‍थ केयर का उत्‍तम से उत्‍तम रास्‍ता जो है और सस्‍ते से सस्‍ता रास्‍ता है वो है स्‍वच्‍छता। योगगुरू रामदेव ने श्री मोदी को भारत को एकजुट, सुदृढ़ और स्‍वच्‍छ बनाने के अथक प्रयासों के लिए राष्‍ट्रऋषि की उपाधि दी और कहा कि श्री मोदी के करिश्‍माई नेतृत्‍व में राष्‍ट्र का समृद्ध होना निश्चित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्‍मान उनके लिए अप्रत्‍याशित है।