ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

देश में ‘एड्स-रोग’ की तरह फैलती ‘नाम’ बदलने की घिनौनी राजनीति!

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

गुजरात में ‘मोटेरा स्टेडियम’ के नाम से विश्व-प्रसिद्ध सर्वाधिक बृहद् स्टेडियम का नाम बदलकर ‘नरेन्द्र मोदी स्टेडियम’ करके ‘नरेन्द्र मोदी’ ने कौन-सा संदेश दिया है? यदि उन्हें इसका संज्ञान भी नहीं था तो अपनी सहमति कैसे दे दी? उसका विरोध क्यों नहीं किया था? क्या नरेन्द्र मोदी उसके लिए ‘सुपात्र’ हैं? नरेन्द्र मोदी ने क्रिकेट-जगत् के लिए ऐसा कौन-सा कर्म किया है, जिसके आधार पर उक्त स्टेडियम का नामकरण किया गया? कितना श्रेयस्कर रहता, यदि ‘महात्मा गांधी स्टेडियम’ रख दिया जाता या फिर ‘मोटेरा स्टेडियम’ ही रखा जाता अथवा देश के महान् क्रिकेट-खिलाड़ी ‘सुनील मनोहर गावस्कर’/ ‘मंसूर अली पटौदी’/’फार्रुख़ इंजीनियर’/ ‘ई० डी० सोल्कर’/’ई० वी० प्रसन्ना’/’चन्द्रशेखर’ के नाम पर रखा जाता।

हमारे देश में यशस्वी खिलाड़ियों की एक बड़ी संख्या है; परन्तु उनकी उपलब्धियों की उपेक्षा करते हुए, आज़ादी के बाद से अब तक देश पर शासन करनेवाले अपने को ही प्रमुखता देते आ रहे हैं।

हमारी न्यायपालिका को इसका स्वत: संबोध करते हुए, एक आदेश प्रसारित करना चाहिए कि किसी भी राजनेता के नाम पर देश के किसी भी सार्वजनिक स्थान :– प्रतिष्ठान, उपक्रम, स्टेडियम, मार्ग तथा शेष धरोहरों का नामकरण नहीं किया जाना चाहिए और जो अब तक किये-कराये गये हैं, उन्हें हटाकर सम्बन्धित स्थलों-स्थानों से सम्बद्ध प्रख्यात लोग और स्थान का नाम ही जुड़ना चाहिए। इतना ही नहीं, घिनौने कृत्यों में संलिप्त राजनेताओं-नेत्रियों की प्रतिमा/मूर्ति भी सार्वजनिक स्थलों पर नहीं लगायी जानी चाहिए।

यह देश लगभग डेढ़ अरब भारतवासियों की है, ‘गिरगिट’ की तरह रंग बदलने और दोगलों की तरह से देश की जनता को भ्रमित करनेवाले, कुत्तों से भी बदतर देशद्रोही राजनेताओं का नहीं है। हमारे आजके लगभग सभी राजनेता मौसम की तरह से चरित्र-चेहरा-चाल बदलते आ रहे हैं; कभी उस दल में तो कभी इस दल में और यह लोकतान्त्रिक मूल्यों के साथ एक क्रूर उपहास है। ऐसे में आपराधिक छविवाले राजनेताओं का सार्वजनिकीकरण औचित्य से परे है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २५ फ़रवरी, २०२१ ईसवी।)

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