ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

क्योंकि मेरे लिए सबसे पहले देश है, उसके बाद कुछ और

सतीश चन्द्र मिश्र-


इसीलिए आज सवेरे लोकतंत्र की रणभूमि (मतदान केंद्र) में अपने मताधिकार का प्रहार करते समय इस पोस्ट के साथ दिए गए ये दो चेहरे तथा पिछले 5 वर्षों के दौरान दिखी अखिलेश सरकार की चाल और चरित्र ही मेरे मनमष्तिष्क को मथ रहे थे. इन चेहरों पर उमड़ा अखिलेश सरकार का असीम अथाह देशघाती प्यार मुझे बार बार याद आ रहा था.
याद दिला दूं की उत्तरप्रदेश की एक अदालत ने 24 अप्रैल 2015 को हरकत उल जिहाद इस्लामी (हूजी) के आतंकवादी तारिक कासमी को राष्ट्रद्रोह के अपराध में उम्रकैद की सजा सुना दी है.. ध्यान यह भी रहे की 2012 में उत्तरप्रदेश की समाजवादी सरकार बनने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने इसी तारिक कासमी और उसके आतंकी साथी खालिद मुजाहिद पर से बिना शर्त यही मुकदमा वापस लेने का आदेश यह कहते हुए दिया था कि जनहित और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने के लिए यह करना बहुत जरुरी है.
उत्तरप्रदेश के उच्च न्यायलय ने इसपर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार को जमकर लताड़ते फटकारते हुए उसका यह फैसला रदद् कर दिया था. 24 अप्रैल 2015 का फैसला आने से पहले ही 2013 में बीमारी के कारण जेल में खालिद मुजाहिद की मौत हो गयी थी. उसकी मौत पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने अपने कैबिनेट मंत्री को 20 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक देकर खालिद मुजाहिद के घर भेजा था.
ज्ञात रहे की प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी तथा फैजाबाद अदालत परिसर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल हूजी के इन दोनों आतंकवादियों को एसटीएफ एवं लखनऊ पुलिस ने 20 December 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन के करीब गिरफ्तार कर लिया था.
पकड़ा गया आतंकी मोहम्मद तारिक कासमी आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी (हूजी) का उत्तरप्रदेश का प्रमुख था तथा दूसरा आतंकवादी खालिद मुजाहिद हूजी एक्शन ग्रुप का मुखिया था। मोहम्मद तारिक कासमी के पास से सवा किलो आरडीएक्स, तीन डेटोनेटर, दो मोबाइल फोन तथा खालिद मुजाहिद के पास 9 अमोनियम नाइट्रेट राड सुपर पावर-90, तीन डेटोनेटर एक मोबाइल फोन तथा दो सिमकार्ड बरामद हुए थे। इनदोनों के अतिरिक्त ऐसे लगभग 2 दर्जन अन्य आतंकवादियों की भी बिना शर्त रिहाई का आदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने दिया था जिसे उत्तरप्रदेश उच्च न्यायलय की लताड़ फटकार खाने के बाद सरकार को वह आदेश वापस लेना पड़ा.
आज सवेरे लोकतंत्र की रणभूमि (मतदान केंद्र) में अपने मताधिकार का प्रहार करते समय मेरे मनमष्तिष्क में उस कांग्रेस का चेहरा भी उथल पुथल मचा रहा था जो इस चुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की साथी सहयोगी बनकर, उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और जिसके नेता कश्मीर में देश की सेना और सुरक्षाबलों के जवानों के खून की होली खेलने को आतुर कश्मीर के पत्थरबाज आतंकवादियों के देशघाती बेशर्म समर्थन में देश की सेना के मुखिया जनरल बिपिन रावत को होश में रहने और औकात नहीं भूलने की धमकी और चेतावनी पिछले 3-4 दिनों से खुलकर दे रहे हैं. इसीलिए आज अपने मताधिकार का प्रहार करते समय सिर्फ यही चेहरे मुझे याद रहे थे ॥

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