कोराँव, ज़िला इलाहाबाद में राष्ट्रीय बौद्धिक-सांस्कृतिक समारोह सम्पन्न

श्री संकटमोचन धाम (आश्रम) की ओर से आश्रम के ‘वार्षिक समारोह २०१७’ के अवसर पर पत्रकार-सम्मेलन’ और ‘कवि-सम्मेलन’ का दो सत्रों में आयोजन किया गया। आरम्भ में मंचस्थ विचारकों और कवि-कवयित्रीगण को अंगवस्त्र और रुद्राक्ष की माला से आभूषित किया गया।
प्रथम सत्र के अन्तर्गत ‘ग्रामीण पत्रकारिता : समस्या और समाधान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी। उस संगोष्ठी में सर्वप्रथम भाषाविद् और मीडियाअध्ययनविशेषज्ञ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने प्रमुख वक्ता के रूप में ग्रामीण पत्रकारिता के सर्वांग पक्षों पर बहुविध प्रकाश डाला। डॉ० पाण्डेय ने कहा,”बँधुआ श्रमिकों की समस्या और उनकी मुक्ति, पुनर्वास की समस्या, भूमि-स्वामित्व, सीमांकन आदिक विषयों को देश के मुख्य पटल पर लाना होगा; साथ ही सामाजिक कुरीतियों, भूमि का असमान वितरण, भूमिधरों का शोषण तथा कृषि की सफलता-विफलता और श्रमिकों के गुण-अवगुणों का भी सम्यक् आकलन करना होगा।”
शिक्षाविद् प्रो० ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने ग्रामीण शब्दावलि की व्युत्पत्तिगत व्याख्या करते हुए, उनकी प्रासंगिकता को सिद्ध किया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विश्रुत पत्रकार और ज्योतिर्विद् डॉ० रामनरेश त्रिपाठी ने ग्रामीण पत्रकारों को आगाह करते हुए कहा, “गाँव की संस्कृति यदि बचानी हो तो ग्रामीण पत्रकारिता को सुदृढ़ करना होगा। ग्रामीण पत्रकारों में प्रशिक्षण का अभाव है, जिसे दूर करना होगा।”
इनके अतिरिक्त डॉ० मुश्ताक़ अली, सुरेशचन्द्र, सुधांशु उपाध्याय आदिक ने अपने विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी का संचालन शिक्षाविद् प्रो० रामकिशोर शर्मा ने किया।
द्वितीय सत्र के अन्तर्गत कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रतिष्ठित कवि रामलखन शुक्ल ने कविसम्मेलन की अध्यक्षता की। डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुख्य अतिथि थे और प्रो० रामकिशोर शर्मा विशिष्ट अतिथि।
अवधनारायण शुक्ल ‘अनगढ़’, कैलाशनाथ पाण्डेय, नज़र इलाहाबादी, कविता उपाध्याय, के०पी० गिरी, महक जौनपुरी आदिक ने कवितापाठ किये। डॉ० इन्दुप्रकाश मिश्र ने संचालन किया। इस समारोह का संयोजन डॉ० विद्याकान्त तिवारी ने किया था।

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