सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

राष्ट्रीयकृत बैंक कॉर्पोरेट लोन माफ कर सकता है फिर किसानों की लोन माफी क्यों नहीं

राकेश पाण्डेय (Trade Union Leader)- 


एक तरफ मोदी जी किसानों को मज़बूत करने का प्रयास कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ देश के किसान को मूत्र सेवन करना पड़ रहा है । अपने हक़ की आवाज़ उठा रहा सेना का जवान बर्खास्त किया जा रहा है । भारत के अन्नदाता को नग्न होना पड रहा है । अगर सरकार किसान और जवान को सुरक्षा और सुविधा नहीं दे सकती तो सवाल उठना लाजिमी है । पिछले 10 सालों में करीब करीब 4 लाख करोड़ रुपये बड़ी कम्पनियों के माफ किये गए। कुछ बड़ी कंपनियां अभी भी 4-5 लाख करोड़ रुपये माफ करने की माँग कर रही हैं। राष्ट्रीयकृत बैंक कॉर्पोरेट लोन माफ कर सकता है फिर किसानों के लोन माफी क्यों नहीं ?

NCRB की मानें तो पिछले 10 वर्षों में करीब करीब 2 लाख किसानों ने ऋण बोझ के चलते आत्महत्या की। इसका जिम्मेदार कौन हैं केंद्र राज्य या डोनाल्ड ट्रम्प? सहकारी समितियों में अब कुत्ते पेशाब करते हैं । गायें गोबर करती हैं। शर्म नही आती सरकारों को। सुनिए मोदी जी जो आपने वोटों के लिए उत्तर प्रदेश के किसानों को ऋण माफी का लेमनचूस पकड़ाया है क्या आपको लगता है अन्य प्रदेशों के किसान किसान नहीं हैं? तमिलनाडु में पिछले 140 सालों के सबसे भीषण सूखा पड़ा है ।तमिल किसान मर रहे हैं उनके पास खाने भर के पैसे नहीं हैं।उनकी कुछ वाजिब मांगे हैं उन्हें सुनने के बजाय केंद्र सरकार नींद में सो रही है बड़ी बड़ी कैशलेश जुमलेबाजी कर रही है।

महाराष्ट्र तमिलनाडु कर्नाटका से लेकर ओडिशा और पूर्वी प्रदेशों में सूखे से किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है। तो कर्जमाफी कम्पनियों के साथ किसानों को क्यों नहीं मिल रहा है। अरुंधती भट्टाचार्या के वाजिब बयान के बाद उन्हें ट्विटर पर लाखों गालियां पड़ीं।लेकिन सरकार कल भी सोई थी आज भी सोई है और कल फिर वोट के लिए यही घोषणा करेगी लेकिन जहां इनकी सरकार नहीं वहां के किसान मरें या जियें उनसे कोई मतलब नहीं। आज इन तमिल किसानों के पीछे न भाजपा है न कांग्रेस न ही कोई अन्य पार्टी क्योंकि न तो चुनाव है न वहां भाजपा या कांग्रेस सरकार है। मीडिया की टीआरपी नहीं बन रही इसलिए मीडिया भी सोनू निगम का बाल उतरवाने में लगी हुई है। मोदी जी काफिला रोककर छोटी बच्ची को गोंद में उठा लेते हैं लेकिन किसान मूत्र पी रहे हैं विष्टा खा रहे हैं और मोदी का काफिला रुककर उनसे झूठे ही सही आंखें भी न मिला पा रहा। जय जवान, जय किसान । थोड़ा बेशर्मी से बोलिये भारत कृषि प्रधान देश है।